

नर्मदापुरम / इटारसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर दीनदयाल रसोई में सेवाभावी कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान जरूरतमंदों और श्रमिक परिवारों को विशेष स्वादिष्ट भोजन कराया गया तथा 200 नाग बूंदी के लड्डू वितरित कर प्रधानमंत्री मोदी के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की गई।
कार्यक्रम के दौरान दीनदयाल रसोई के संचालक मनीष सिंह ठाकुर ने कहा कि रसोई जरूरतमंदों के लिए बड़ा संबल है। प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर गरीब एवं जरूरतमंद के बीच भोजन और मिठाई बांटकर खुशियां साझा की गईं। जनसेवा के माध्यम से जन्मदिवस मनाना समाज को सकारात्मक और प्रेरणादायी संदेश देता है।
इस अवसर पर दीनदयाल रसोई के संचालक मनीष सिंह ठाकुर, विक्रम सिंह, दीनदयाल रसोई प्रभारी नितिन वर्मा, अध्यक्ष शालिनी निमोरिया, यश ठाकुर, विक्की ठाकुर एवं विजय कुमार सहित अनेक नागरिक और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने भोजन वितरण में सहयोग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिवस की शुभकामनाएं दीं।
पितृपक्ष में दोनों समय कराया जाएगा भोजन…
कार्यक्रम के दौरान खाटू श्याम रसोई के सेवादार नितिन वर्मा ने बताया कि पितृपक्ष में जरूरतमंदों को दोनों समय विशेष भोजन कराया जाएगा। उन्होंने नगरवासियों से अपने दिवंगत माता-पिता, परिजनों एवं पूर्वजों की पुण्य स्मृति में भोजन सेवा से जुड़ने की अपील की।
खाटू श्याम रसोई पिछले तीन वर्षों से जनसहयोग के माध्यम से जरूरतमंदों, असहाय लोगों और श्रमिक परिवारों को सम्मानपूर्वक भोजन उपलब्ध करा रही है। शहर के अनेक परिवार जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, पुण्यतिथि एवं अन्य विशेष अवसरों पर रसोई में भोजन सेवा कराते हैं। कई परिवार स्वयं उपस्थित होकर जरूरतमंदों को भोजन परोसते हैं।
नितिन वर्मा ने कहा कि हिंदू धार्मिक मान्यताओं में पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों के स्मरण, श्राद्ध, तर्पण और अन्नदान का विशेष महत्व है। पितरों की स्मृति में किसी भूखे व्यक्ति की थाली भरना और जरूरतमंद के चेहरे पर संतोष की मुस्कान लाना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
उन्होंने कहा कि पूर्वज भले ही हमारे बीच प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित नहीं हैं, लेकिन उनके दिए संस्कार, स्नेह और आशीर्वाद सदैव परिवार के साथ रहते हैं। नगरवासी अपने पितरों की स्मृति को सेवा का स्वरूप देकर इस पुनीत अभियान में सहभागी बन सकते हैं।
“पितरों की स्मृति में किया गया अन्नदान केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि मानव सेवा और कृतज्ञता का सबसे मार्मिक स्वरूप है।”
— नितिन वर्मा, सेवादार खाटू श्याम रसोई, इटारसी।

