पुनर्वास और सिविल सिविल सर्जन के कर्मचारी नहीं दे रहे ध्यान
गरीब बच्चे के पिता हो रहे परेशान, नहीं मिल रहा योजना का लाभ
दयाराम फौजदार रिपोर्टर राज एक्सप्रेस नर्मदापुरम।
जिला चिकित्सालय की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़ा करने वाला एक मामला सामने आया है। छह वर्षीय मूक-बधिर बालक कार्तिक अहिरवार का दिव्यांग प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए उसके पिता रामकृष्ण अहिरवार पिछले दो वर्षों से जिला चिकित्सालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक बच्चे का दिव्यांग प्रमाण-पत्र नहीं बन सका है। रामकृष्ण अनुसूचित जनजाति से आते हैं और आर्थिक रूप से कमजोर एवं गरीबी रेखा के परिवार से हैं । मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। कार्तिक की मां नहीं है पिताजी ही उनका पालन पोषण करते हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए वे लगातार प्रमाण-पत्र बनवाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें एक डॉक्टर से दूसरे डॉक्टर के पास भेज दिया जाता है। पुनर्वास केंद्र के कर्मचारी सिविल सर्जन ऑफिस के कर्मचारियों के पास भेजते हैं तो कभी यहां से वहां। रामकृष्ण ने बताया आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराने के लिए कई बार संपर्क किया। कभी एक डॉक्टर दूसरे डॉक्टर के पास भेजता है तो कभी उन्हें भोपाल में जांच होने की बात कहकर वहां जाने के लिए कहा जाता है। दो साल से समाधान नहीं मिला। बताया गया कि रामकृष्ण क्षेत्रीय विधायक डॉ. सीताशरण शर्मा का पत्र लेकर भी जिला चिकित्सालय पहुंचे थे। उनका आरोप है कि पत्र दिखाने के बाद भी चिकित्सकों की ओर से उन्हें यह कहकर वापस कर दिया गया कि प्रमाण-पत्र तो चिकित्सकों को ही बनाना है और अब भोपाल जाकर जांच कराने की बात कही गई।
जांच यहां नहीं होती भोपाल जाना होगा- सीएमएचओ
इस मामले में जब सीएमएचओ ऑफिस से संपर्क किया तो वहां के कर्मचारियों ने बताया कि पुनर्वास केंद्र जाने का बोला था। कर्मचारियों ने बताया कि कान और मुंह की जांच यहां नहीं होती है। उनका कहना है कि सिविल सर्जन के ऑफिस में भी उन्हें भेजा गया था। कर्मचारियों को कहना है कि भोपाल में उन्हें कहां जाना है अब उन्हें बताएंगे और आगे की कार्रवाई करेंगे।

