अंतिम दिवस 1 लाख 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने लिया ऐतिहासिक पद्मशेश नागद्वार स्वामी के दर्शनों का पुण्य लाभ
दयाराम फौजदार रिपोर्टर राज एक्सप्रेस नर्मदापुरम नर्मदापुरम।
मध्य प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी में 8 अगस्त से 17 अगस्त तक चल रहे नागद्वारी मेले में सतपुड़ा के घने जंगलों में स्थित नागद्वारी गुफा के दर्शन करने के लिए लाखों श्रद्धालुओं ने दुर्गम रास्तों को पर करते हुए यात्रा पूरी की। इस अवधि में निर्जन वनों एवं दुर्गम घाटियों की बाधाओं को पार करके लाखों भक्तों का सैलाब पद्मशेष नागद्वार मंदिर पहुंचा। साल में एक बार खुलने वाले इस मंदिर के प्रति भक्तों की अटूट आस्था एवं विश्वास ही थी जो वे सभी कठिनाइयों को भी परास्त कर भगवान पद्मशेष नागद्वार के दर्शन करने पहुंच गए। सदियों पुराने नागद्वारी मेला के संबंध में अनेको कथाएं प्रचलित है जिनसे मेले के महत्व के ऐतिहासिक प्रमाण भी मिलते हैं। नर्मदापुरम जिला प्रशासन के प्रयासों से मध्य प्रदेश की यह अति विशेष नागद्वारी यात्रा का सोमवार को नाग पंचमी के पर्व पर समापन किया गया। 18 अगस्त मंगलवार तक सभी श्रद्धालु भी नागद्वारी गुफा क्षेत्र से वापस पहुंच जाएंगे।
कलेक्टर और एसपी ने पचमढ़ी में रहकर रखी निरंतर निगरानी
नागपंचमी पर्व पर श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा एवं पुलिस अधीक्षक श्री साई कृष्ण एस. थोटा रविवार रात से ही पचमढ़ी में उपस्थित रहे और मेला क्षेत्र की व्यवस्थाओं पर निरंतर निगरानी बनाए रखी। कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा ने कहा कि जिला प्रशासन, पुलिस विभाग एवं वन विभाग के संयुक्त प्रयासों से नागद्वारी मेले का सफल एवं सुचारू आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं। उन्होंने मेले में शामिल सभी श्रद्धालुओं को नागपंचमी पर्व की शुभकामनाएं दीं।
प्रशासनिक प्रोटोकॉल के बिना आम श्रद्धालु की तरह मेले में पहुंचे कलेक्टर
नागद्वारी मेले में उस समय आत्मीय माहौल देखने को मिला, जब कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा प्रशासनिक दायित्वों से इतर एक आम श्रद्धालु की तरह मेले में पहुंचे और श्रद्धालुओं के साथ मेले का आनंद लिया। कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा ने मेले में पहुंचकर विभिन्न दुकानों का भ्रमण किया तथा दुकानदारों से संवाद करते हुए स्थानीय उत्पादों एवं अन्य सामग्री की खरीदारी भी की। इस दौरान उन्होंने मेले की रौनक, श्रद्धालुओं की आस्था और स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों का भी जायजा लिया। कलेक्टर के साथ पुलिस अधीक्षक श्री साई कृष्ण एस. थोटा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हिमांशु जैन एवं एसडीएम श्री आकिप खान भी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने श्रद्धालुओं के बीच पहुंचकर मेले के वातावरण का आनंद लिया।
कंट्रोल रूम से पूरे मेला क्षेत्र की व्यवस्थाओं पर नजर
जिला प्रशासन एवं महादेव मेला समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा, स्वास्थ एवं सुरक्षा की दृष्टि से इस वर्ष भी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थी जिससे श्रद्धालु सुगमतापूर्वक यात्रा पूरी करें और मंदिर पहुंचकर दर्शन लाभ ले। नागद्वारी मेले के सफल एवं सुचारु संचालन के लिए जिला प्रशासन द्वारा एकीकृत कंट्रोल रूम स्थापित किया गया था जिसके द्वारा मेले में प्रत्येक सेक्टर पॉइंट से वायरलेस कनेक्टिविटी को जोड़ा गया है। किसी भी वस्तु की आवश्यकता पड़ने पर कंट्रोल रूम के माध्यम से संबंधित विभाग के साथ समन्वय कर सेक्टर पॉइंट्स पर सभी आवश्यक सामग्रियों की पूर्ति की गई। साथ ही अधिकारियों एवं कर्मचारियों के ड्यूटी स्थान पर उनकी उपस्थिति को भी सुनिश्चित किया गया। कंट्रोल रूम के माध्यम से मेले में दर्शन करने आये श्रद्धालू जो अपने परिजनों से बिछड जाते हैं, उनको पुलिस एवं आपदा प्रबंधन के जवानों से समन्वय कर परिजनों से मिलवाया गया। उक्त कार्य के लिए जगह-जगह पर खोया पाया केंद्र भी बनाए गए। केंद्र पर उपस्थित संबंधित कर्मचारियों द्वारा पूरी सजगता एवं मुस्तैदी के साथ बिछड़े हुए श्रद्धालुओं को अपने परिजनों से भी मिलवाया गया।
24 घंटे मुस्तैद रहे पुलिस, स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन दल
पुलिसबल, डॉक्टर, आपदा मित्र, होमगार्ड की टीम 24 घंटे राउंड वार श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं निरन्तर सेवा के लिए विभिन्न प्वाईन्टों पर मौजूद रही, इसके साथ तहसीलदार, नायब तहसीलदार भी अपने प्वाईंटों पर तैनात रहे I अन्य वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा भी समय-समय पर संपूर्ण मेला क्षेत्र का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। इस कठिन यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए नर्मदापुरम जिला प्रशासन द्वारा प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी विशेष व्यवस्थाएं की गई। रास्ते में लोहे की कृत्रिम सीढ़ियां लगाई गई हैं, कठिन चढ़ाई वाले स्थानों पर होमगार्ड के जवान श्रद्धालुओं की मदद के लिए उपलब्ध रहे।
भक्ति और आस्था से सराबोर रहा पूरा यात्रा मार्ग
रिमझिम बारिश और ढोल नगाड़ों की तान पर बम बम भोले के गगनभेदी जयघोष से 10 दिनों तक सतपुड़ा की रानी गुलजार रही। भक्ति और आस्था के सहारे पर्वत जेसी कठिन यात्रा भी श्रद्धालुओं के हौंसले के सामने साधारण मार्ग सी रही। नागद्वारी यात्रा के दौरान संपूर्ण मार्ग शिव पुराण कथाओं, भजन-कीर्तन एवं भक्ति संगीत से गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान आध्यात्मिक एवं मानसिक ऊर्जा प्रदान करने के लिए विभिन्न स्थानों पर धार्मिक आयोजन किए गए।
पद्मशेष नागद्वारी से जुड़ी हैं पौराणिक मान्यताएं
पौराणिक मान्यता के अनुसार, यह स्थान पद्मशेष वासुकी नाग का निवास स्थल रहा है। यहां हलवा, नारियल और नींबू से पूजा की जाती है। संपूर्ण यात्रा मार्ग में शिव पुराण कथाएं, भजन-कीर्तन और भक्ति संगीत का आयोजन श्रद्धालुओं को मानसिक और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है।
ऐसी मान्यता है कि छिन्दवाडा के निकट सौंसर की एक दम्पत्ति हेवत राम एवं मैना देवी जिनके यहा संतान नहीं होती थी इस दंपति ने पदमशेष में मानता करी थी की यदि उनके यहा संतान होती है तो वो नाग देवता को काजल लगायेगी। समय के साथ उनके यहा श्रवण कुमार नामक पुत्र का जन्म हुआ किन्तु किन्हीं कारणवश अपनी मानता भूल गई, तब नाग देवता ने इस दम्पत्ति के स्वप्न में दर्शन देकर उन्हें उनकी मानता की याद दिलाई तब ये दंपत्ति नागदेवता को आंख में काजल लगाने के लिए नागद्वारी पहुंची तब नागदेवता ने अपने विराट रूप के दर्शन दिये किन्तु मैना देवी नागदेवता के विराट रूप को देख कर डर गई और अपनी मानता पूरी नहीं कर पाई। तब नागदेवता ने उनके पुत्र श्रवण कुमार को डस लिये जिससे उनकी मृत्यु हो गई जिनकी समाधी आज भी इस स्थल पर मौजूद है। इसी परम्परा एवं मानता के आधार पर महाराष्ट्र एवं अन्य जिलों से श्रद्धालु प्रतिवर्ष नागदेवता को काजल अर्पित करने नागद्वार आते है। यह मेला कई वर्षों से निरंतर चला आ रहा है, इस स्थाल का उल्लेख 1889 में प्रकाशित केप्टन जेम्स फॉरसिथ

