
नर्मदापुरम / जिले में किसानों की गाढ़ी कमाई पर प्रशासनिक लापरवाही और अधिकारियों की मिलीभगत का एक बड़ा मामला सामने आया है। नपा सहकारी समिति में वर्ष 2026-27 के गेहूं उपार्जन के दौरान हुई गंभीर अनियमितताओं के कारण लगभग 5,700 क्विंटल गेहूं (जिसकी बाजार कीमत 25 लाख रुपये से अधिक है) सड़कर पूरी तरह खराब हो गया। इस लापरवाही से ना केवल शासन को लाखों रुपये का चूना लगा है, बल्कि बेकसूर किसानों को भी अपनी फसल और भुगतान दोनों से हाथ धोना पड़ रहा है। समय पर वेयरहाउस नहीं भेजा गया। मिली जानकारी के अनुसार, नपा समिति द्वारा किसानों से भारी मात्रा में गेहूं की खरीदी की गई थी। नियम अनुसार खरीदे गए अनाज को समय रहते सुरक्षित सरकारी वेयरहाउस (गोदाम) में जमा कराया जाना चाहिए था। परंतु समिति प्रबंधक और प्रशासक की लापरवाही के कारण गेहूं को खरीदी केंद्र पर ही खुले में छोड़ दिया गया। बारिश और नमी से है खराब हो गया। लंबी देरी के बाद जब गेहूं को सरकारी गोदाम भेजा गया, तो वह अत्यधिक नमी के कारण सड़ और गल चुका था। इसके चलते वेयरहाउस प्रबंधन ने इस खराब गेहूं को लेने से साफ इनकार कर दिया और माल वापस लौटा दिया।
567 क्विंटल का ‘स्पॉट शॉर्टेज’ और दागी अधिकारियों की भूमिका
इस पूरे मामले में खरीदी के दौरान लगभग 567 क्विंटल गेहूं का ‘स्पॉट शॉर्टेज’ (भौतिक सत्यापन में कमी) भी दर्ज किया गया है, जो सीधी वित्तीय धांधली की ओर इशारा करता है। आरोप है कि इस पूरे खेल में ब्रांच मैनेजर एवं प्रशासक धर्मेंद्र पटेल और समिति प्रबंधक कमलेश गोस्वामी की साठगांठ रही है। गंभीर सवाल पूर्व में रिकॉर्ड खराब होने के बावजूद कमलेश गोस्वामी को उपार्जन केंद्र का प्रभार क्यों सौंपा गया? हालांकि, उनके खराब ट्रैक रिकॉर्ड के कारण ही बाद में समिति को मूंग खरीदी केंद्र बनाने से रोक दिया गया था, लेकिन गेहूं खरीदी में दी गई ढील का खामियाजा अब शासन और किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
ना जांच हुई, ना किसानों को मिला मुआवजा गेहूं सड़ने और वापस आने के बावजूद अब तक ना तो कोई ठोस प्रशासनिक जांच हुई है और ना ही लापरवाह अधिकारियों पर कोई सख्त कानूनी या विभागीय कार्रवाई की गई है। सबसे बुरा असर उन किसानों पर पड़ा है, जिनका गेहूं इस लापरवाही की भेंट चढ़ गया। किसानों को ना तो उनकी उपज का भुगतान मिला है और ना ही उनका गेहूं वापस लौटाया गया है। घटनाक्रम पर जब जिला सहकारी बैंक के अधिकारियों से बात की गई, तो उनका कहना है कि संबंधित जिम्मेदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं और नुकसान की राशि जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, स्थानीय किसानों और किसान संगठनों का कहना है कि सिर्फ नोटिस जारी करना केवल औपचारिकता है। जब तक दोषियों पर केस दर्ज कर नुकसान की वसूली नहीं की जाती और किसानों का बकाया भुगतान नहीं होता, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।

