नर्मदापुरम / नारद जयंती हर साल ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि पर मनाई जाती है। मान्यता है कि देवर्षि नारद इसी तिथि पर प्रकट हुए थे। पौराणिक कथाओं में नारदजी बेहद लोकप्रिय हैं और वे ब्रह्माजी के मानस पुत्रों में से एक है। वहीं, कहा जाता है कि भगवान विष्णु के जिन 24 अवतारों के बारे में बताया गया है उनमें से एक देवर्षि नारदजी हैं। इस दिन भगवान विष्णु और नारद जी की पूजा करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से जातक को विष्णुजी की कृपा प्राप्त हो सकती है। साथ ही, जीवन में सुख-शांति आती है।
नारद जयंती 2026 कब है?
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पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि का आरंभ 2 मई, शनिवार को मध्य रात्रि 12 बजकर 51 मिनट पर होगा। वहीं, अगले दिन यानी 3 मई, रविवार को मध्य रात्रि के बाद 3 बजकर 2 मिनट तक द्वितीया तिथि व्याप्त रहेगी। ऐसे में उदया तिथि की गणना के अनुसार, 3 मई, रविवार के दिन नारद जयंती मनाना शास्त्र सम्मत होगा। इस दिन शुभ मुहूर्त में पूजा करना फलदायी माना जाता है।
नारद जयंती 2026 पूजा विधि
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इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करने के बाद साफ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके पश्चात, पूजा घर को साफ कर लें और वहां चारों ओर गंगाजल का छिड़काव करें।
पूजा स्थल को साफ करने के बाद सबसे पहले भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। विष्णुजी को ताजे पुष्प, फल, चंदन, कुमकुम आदि अर्पित करें।
साथ ही, धूप, दीप आदि के साथ विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा और आरती करें। इसके बाद, नारदजी की भी आराधना विधि-विधान से करनी चाहिए।
पूजा के दौरान भगवान विष्णु को पंचामृत का भोग भी अवश्य लगाएं और उसमें तुलसी दल को शामिल करें। क्योंकि विष्णुजी को तुलसी बेहद प्रिय है। मान्यता है कि नारद जयंती पर भगवान विष्णु और नारदजी की पूजा करने से शुभ फल प्राप्त होता है। साथ ही, साधक पर विष्णुजी की कृपा बनी रह सकती है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नारद जयंती को नारद जी की पूजा अर्चना करने से ज्ञान, बल और बुद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही, इस दिन भगवान विष्णु के मंदिर में जाकर बांसुरी भी जरूर अर्पित करनी चाहिए।
दान-पुण्य करना होता है शुभ
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नारद जयंती के दिन दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराना, जरूरतमंद लोगों की सहायता करना और धर्म कार्यों में भाग लेना विशेष फलदायी होता है। मान्यता है कि इससे व्यक्ति के जीवन में शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं और कष्ट दूर होते हैं।
क्या है नारद जयंती का महत्व
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नारद जी ब्रह्मा जी के मानस पुत्र हैं और उन्हें सृष्टि का पहला पत्रकार भी कहा जाता है। वे तीनों लोकों में भ्रमण कर देवताओं और मनुष्यों के बीच संदेश पहुंचाते थे। नारद जी भगवान विष्णु के परम भक्त माने जाते हैं और वे निरंतर नारायण-नारायण का जाप करते रहते हैं। मान्यता है कि नारद जी भक्तों की प्रार्थनाएं भगवान तक पहुंचाते हैं। इस दिन उनकी पूजा करने से ज्ञान, बुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। साथ ही भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करने से जीवन में सुख समृद्धि और शांति बनी रहती है। यह दिन भक्ति और सेवा का संदेश भी देता है। (संकलन – प्रीति चौहान)

