हादसों को रोकने के लिए सड़कों में किए जाएं तकनीकी सुधार, ब्लैक स्पॉट्स को खत्म किए जाने के लिए तैयार करें योजना
यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर बिना दबाव करें सख्त से सख्त कार्रवाई
दयाराम फौजदार रिपोर्टर नर्मदा पुरम
सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष और सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे ने शनिवार को शहर प्रवास के दौरान कलेक्टर कार्यालय के सभा कक्ष में सड़क सुरक्षा से जुड़े मामलों की समीक्षा की। न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने जिला सड़क सुरक्षा समिति के साथ बैठक कर जिले में पिछले 5 वर्षों में हुए हादसों उनके कारण तथा हादसों के दौरान हुई मृत्यु की विस्तार पूर्वक समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने पिछले वर्षों में सड़क सुरक्षा समिति की आयोजित बैठकों की जानकारी भी ली तथा उन बैठकों के दौरान सड़क सुरक्षा से जुड़े हुए मामलों में क्या सुधार कार्य किए गए हैं इसकी जानकारी भी ली। बैठक के दौरान कलेक्टर सुश्री सोनिया मीना द्वारा बताया गया कि पूर्व में आयोजित बैठकों के दौरान 25 से अधिक ब्लैक स्पॉट्स को चिन्हित किए गए थे उन्हें खत्म कर दिया गया है। केवल एक ब्लैक स्पॉट शेष है जिसे खत्म करने के लिए बनाई गई कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है। न्यायमूर्ति सप्रे ने अधिकारियों से कहा, “आप सभी को यह सुनिश्चित करना है कि सड़क हादसे क्यों हो रहे हैं, उनके कारण क्या हैं और उन्हें कैसे रोका जा सकता है। इसके लिए व्यापक कार्य योजना बनाकर उसे गंभीरता से क्रियान्वित करें।” 6 माह बाद सड़क हादसों में मृत्यु दर तथा हादसों की संख्या का फिर से आकलन किया जायेगा। इस अवधि में प्रयास करें कि सड़क हादसों में न्यूनतम मृत्यु हो अथवा मृत्यु दर को शून्य ही कर दिया जाए।
सड़क हादसे में पीड़ित का पूरा परिवार को कष्ट का सामना करना करता है
न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने कहा कि सड़क हादसों में जनहानि होना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अगर हम मानवीय दृष्टिकोण से देखें तो सड़क हादसों में केवल पीड़ित ही नहीं बल्कि उसका पूरा परिवार भी इस विपत्ति के कारण कष्टों का सामना करता है। बैठक के दौरान न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु के लिए बिना हेलमेट के यात्रा, बिना सीट बेल्ट के यात्रा, निर्धारित गति सीमा से अधिक गति से गाड़ी चलाना तथा ड्रिंक एंड ड्राइव जैसे कारण भी प्रमुख है। उन्होंने कहा इन सब की अतिरिक्त इंजीनियरिंग फैलियर भी सड़क हादसों को आमंत्रित करने की एक प्रमुख वजह है। उन्होंने कहा कि खराब इंजीनियरिंग तथा गुणवत्ता हीन सड़कों के निर्माण के लिए संबंधितों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई भी की जाना सुनिश्चित किया जाए। न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने कहा कि मध्य प्रदेश सड़क हादसों की संख्यात्मक तुलना में पूरे देश में दूसरे नंबर पर है। उन्होंने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाना बहुत आवश्यक है। न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने कहा कि सड़क पर चलने वाले हर एक व्यक्ति का जीवन बहुत ही बहुमूल्य है। समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि किसी अन्य की गलती से सड़क पर चलने वाले निर्दोषों की मृत्यु होना या जीवन भर के लिए हादसे की विभीषिका झेलना न्यायसंगत नहीं है। इस स्थिति को सुधारना हमारी साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आम जनमानस के बीच यह जागरूकता लाई जाए कि हेलमेट लगाने से दुर्घटनाओं में जनहानि को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि समय समय पर हेलमेट वितरण भी करवाया जाए। सड़क हादसों में घायल होने वाले तथा जान गंवाने वाले लोगों में सबसे अधिक 20 से 45 आयु वर्ग के युवा होते हैं इसीलिए विशेष तौर पर युवाओं को हेलमेट ना पहने एवं अधिक गति से वाहन चलाने के दुष्प्रभावों से अवगत कराने के लिए उन्हें जागरूक करें। न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने कहा कि ड्रिंक एंड ड्राइव तथा यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध बिना किसी दबाव के सख्त से सख्त कार्यवाही की जाना भी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि मार्गो पर गड्ढों की भी मरम्मत करवाई जाए, मानक स्पीड में वाहन नहीं चलाने वालों के विरुद्ध यातायात पुलिस तथा परिवहन विभाग सख्ती से कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि जिले में संचालित पब्लिक ट्रांसपोर्ट वाहनों की फिटनेस, बीमा, ड्राइवर के ड्राइविंग लाइसेंस, वैद्य संचालन परमिट तथा परिवहन विभाग द्वारा निर्धारित किए गए अन्य मापदंडों के अनुसार ऐसे वाहनों की भी परिवहन विभाग द्वारा नियमित जांच सुनिश्चित की जाए। न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने कहा कि स्कूलों में भी विद्यार्थियों को यातायात नियमों की जानकारी दी जाए। पेट्रोल पंप पर नो हेलमेट नो पेट्रोल की नीति भी लागू करें जिससे लोगों में हेलमेट पहनना एवं सीट बेल्ट लगाने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिले।

