


नर्मदापुरम / जिले में बालिकाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल करते हुए, समर्पण संस्थान और नर्मदापुरम पुलिस प्रशासन के सहयोग से जिले में पहली बार पुनः उपयोग योग्य सैनिटरी पैड्स की शुरुआत की गई है। यह पहल मासिक धर्म को लेकर जागरूकता बढ़ाने के साथ साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक सार्थक प्रयास मानी जा रही है। मंगलवार को केसला विकासखंड के अंतर्गत उत्कृष्ट विद्यालय केसला एवं संदीपनी विद्यालय, ग्राम सुखतवा में छात्राओं के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को मासिक धर्म से जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों, व्यक्तिगत स्वच्छता और आत्म देखभाल के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस दौरान समाज में मासिक धर्म को लेकर चली आ रही चुप्पी, झिझक और भ्रांतियों पर भी खुलकर चर्चा की गई, ताकि छात्राएं इसे एक स्वाभाविक जैविक प्रक्रिया के रूप में समझ सकें। कार्यक्रम में उपस्थित अतिरिक्त आयुक्त आयकर, डॉ. मेघा भार्गव ने कहा कि वर्तमान में उपयोग किए जाने वाले सामान्य प्लास्टिक आधारित सैनिटरी पैड्स को पूरी तरह नष्ट होने में लगभग 500 वर्ष लगते हैं। ऐसे पैड्स उपयोग के बाद लैंडफिल में जाकर पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव डालते हैं। उन्होंने बताया कि पुनः उपयोग योग्य कपड़े से बने सैनिटरी पैड्स इस प्लास्टिक कचरे को लैंडफिल तक पहुंचने से रोकने में मदद करते हैं और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करते हैं। डॉ. मेघा भार्गव ने यह भी बताया कि ये पैड्स स्वास्थ्य के लिए अधिक सुरक्षित विकल्प हैं, क्योंकि इनमें हानिकारक रसायन नहीं होते। इनके उपयोग से त्वचा में जलन, बार बार होने वाले संक्रमण और असहजता की संभावना कम होती है। सही तरीके से उपयोग और साफ सफाई रखने पर ये पैड्स लंबे समय तक सुरक्षित रूप से इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जिससे छात्राओं को नियमित रूप से बाजार से महंगे उत्पाद खरीदने की आवश्यकता भी नहीं पड़ती। इस अवसर पर समर्पण संस्थान की संस्थापक डॉ. रुमा भार्गव ने कहा कि मासिक धर्म स्वच्छता केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं है, बल्कि यह बालिकाओं की शिक्षा, गरिमा और समान अवसर से सीधे जुड़ा हुआ मुद्दा है। उन्होंने कहा कि जब बालिकाओं को सुरक्षित, किफायती और टिकाऊ समाधान उपलब्ध कराए जाते हैं, तो स्कूल में उनकी उपस्थिति बढ़ती है और आत्मविश्वास में भी सकारात्मक बदलाव आता है। डॉ. रुमा भार्गव ने जानकारी दी कि समर्पण संस्थान अब तक राजस्थान और मध्य प्रदेश में 20,000 से अधिक बालिकाओं तक मासिक धर्म स्वच्छता समाधान पहुंचा चुका है। संस्थान वर्षों से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता पर निरंतर कार्य कर रहा है और इस क्षेत्र में उसके प्रयासों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान और सम्मान प्राप्त हुआ है।

