
नर्मदापुरम / सिवनी मालवा में महर्षि वाल्मीकि जयंती पर विश्व हिंदू परिषद सामाजिक समरसता आयाम द्वारा कार्यक्रम आयोजित कर वाल्मीक बंधुओं, वरिष्ठजनों एवं मातृशक्ति का सम्मान किया गया।
विश्व हिंदू परिषद नगर सामाजिक समरसता प्रमुख रविन्द्र छिरेले ने बताया कि स्थानीय जय स्तंभ चौक पर आयोजित महर्षि वाल्मीकि जयंती समारोह में पंडित पुनीत दुबे, विश्व हिंदू परिषद प्रांत सह धर्माचार्य संपर्क प्रमुख शिव राठौर, जिला उपाध्यक्ष प्रवीण अवस्थी, पूर्व जिला संयोजक सतीश बकोरिया, पार्षद ईश्वर जमीदार, डॉ. किरण राठौर, दुर्गेश उईके, पार्षद प्रतिनिधि तुलसीराम कुशवाह, खेमचंद चौकसे, एल्डरमैन कमलेश लोवंशी, देवी कुशवाह, जागृत हिंदू संस्कृति रक्षक मंच नगर अध्यक्ष राघवेंद्र अग्रवाल सहित अतिथियों ने भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
कार्यक्रम में वाल्मीकि बंधुओं, वरिष्ठजनों एवं मातृशक्ति सहित सुशील गोहर, दीप टांक, चरण दास टांक आदि का तिलक लगाकर एवं हार-माला पहनाकर स्वागत किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूज्य धर्माचार्य पंडित पुनीत दुबे ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने राम नाम के जप से ब्रह्म ऋषि के समान पद प्राप्त किया। निषाद की प्रतिष्ठा पर उनके मुख से प्रथम काव्य निकला, जिसके कारण वे आदिकवि कहलाए। संस्कृत के प्रथम काव्य रामायण की रचना कर उन्होंने मानव जाति को भगवान राम, लक्ष्मण, लव-कुश और रामायण का दर्शन कराया।
विहिप जिला उपाध्यक्ष प्रवीण अवस्थी ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि भारतीय संस्कृति, साहित्य एवं आध्यात्मिक परंपरा के महान ऋषि और आदिकवि के रूप में पूजनीय हैं। उन्होंने रामायण की रचना कर संपूर्ण मानव समाज को मर्यादा, सत्य, धर्म, त्याग, करुणा और कर्तव्यपरायणता का संदेश दिया।
प्रांत सह धर्माचार्य संपर्क प्रमुख शिव राठौर ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि का जीवन आत्मज्ञान, साधना और आध्यात्मिक परिवर्तन का प्रतीक है। उनका जीवन सिखाता है कि मनुष्य अपने विचारों, कर्मों और संकल्पों से स्वयं को बदलकर महानता के शिखर तक पहुंच सकता है। उनकी रचित रामायण आज भी करोड़ों लोगों को धर्म, संस्कार और सदाचार की प्रेरणा देती है।
कार्यक्रम का संचालन पूर्व जिला सह संयोजक सतीश बकोरिया ने किया एवं आभार नगर समरसता प्रमुख रविन्द्र छिरेले ने व्यक्त किया।
इस अवसर पर नगर मंत्री सुशील गोहर, नगर उपाध्यक्ष अशोक कुचबंदिया, जगदीश केवट, कम्मू गौर, मातृशक्ति नगर सह संयोजिका नीलिमा सकतपुरिया, दुर्गावाहिनी ग्रामीण संयोजिका मोना दायमा, राकेश केवट, आयुष योगी, वीरू गनगोरे, मनीष बाथ, तरुण सुनानिया सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, नागरिक एवं मातृशक्ति उपस्थित रही।

