

नर्मदापुरम / सरस्वती स्कूल में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ शुक्रवार प्रातः 10:30 बजे हुआ और दोपहर 11:50 बजे कार्यक्रम का समापन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं सहित आमंत्रित अतिथिगण एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वजारोहण के साथ हुआ। इसके पश्चात राष्ट्रगान हुआ तथा दीप प्रज्वलन किया गया। ठीक प्रातः 11 बजे विद्यालय परिसर में उपस्थित सभी लोगों ने एक साथ सामूहिक रूप से वंदे मातरम् गीत का गायन किया। इस दौरान पूरा विद्यालय परिसर राष्ट्रभक्ति के भाव से गुंजायमान हो उठा।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. अतुल सेठा उपस्थित रहे। उन्होंने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक महत्व और स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम् भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में राष्ट्रीय चेतना और मातृभूमि के प्रति समर्पण का महत्वपूर्ण स्वर बना। यह गीत उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में भी शामिल था। वर्ष 1905 के बंग-भंग आंदोलन के दौरान वंदे मातरम् व्यापक रूप से जनआंदोलन और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बन गया।
डॉ. सेठा ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारतीयों में राष्ट्रीय चेतना और मातृभूमि के प्रति समर्पण जगाने वाला प्रेरणास्रोत रहा है। उन्होंने इसके ऐतिहासिक संदर्भ, स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका तथा इसके विभिन्न चरणों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि वंदे मातरम् के मूल रूप में छह अंतरे हैं और वर्तमान समय में इसके 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर देशभर में इसके ऐतिहासिक महत्व को याद किया जा रहा है। संसद में भी वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर विशेष चर्चा हुई थी।
मुख्य वक्ता ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे राष्ट्रगीत के इतिहास को समझें, उसके भाव को आत्मसात करें तथा राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना को अपने जीवन में उतारें। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रखर राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय चेतना की आवश्यकता है।
देशभर में सामूहिक गायन का उल्लेख…
कार्यक्रम में अरुण इंगले, लोक शिक्षण संचालनालय से संबद्ध अधिकारी, ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने विद्या भारती के संगठन के साथ वंदे मातरम् के सामूहिक गायन से जुड़े आयोजन का उल्लेख करते हुए कहा कि देशभर के हजारों विद्यालयों में विद्यार्थियों और नागरिकों ने एक साथ वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया। उन्होंने ऐसे आयोजनों को विद्यार्थियों में राष्ट्रीय भावना जागृत करने का माध्यम बताया।
राष्ट्र प्रथम की भावना सर्वोपरि — माया नारोलिया…
कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि राज्यसभा सांसद श्रीमती माया नारोलिया ने कहा कि प्रत्येक नागरिक के मन में ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना सर्वोपरि होनी चाहिए। उन्होंने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को राष्ट्रगीत का अर्थ और भाव समझाते हुए उसे कंठस्थ कराया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विद्यालयों में विद्यार्थियों के बीच राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति की भावना को मजबूत करने के लिए ऐसे कार्यक्रम महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों के साथ वंदे मातरम् के प्रति सम्मान और राष्ट्रभावना को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में मुकेश श्रीवास्तव, अरुण इंगले, डी एस दांगी, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमति नीतू यादव, श्रीमति रेखा गुप्ता, प्राचार्य मुकेश दांगी जी सहित अन्य अतिथिगण, शिक्षक-शिक्षिकाएं, विद्यालय के छात्र-छात्राएं तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
विद्यालय परिवार ने व्यक्त किया आभार
कार्यक्रम के अंत में सरस्वती स्कूल के प्राचार्य मुकेश दांगी ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं उपस्थित नागरिकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विद्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा प्रेरणादायी अवसर रहा।
कार्यक्रम के दौरान सामूहिक रूप से गाए गए वंदे मातरम् ने विद्यालय परिसर में राष्ट्रभक्ति का वातावरण निर्मित कर दिया। विद्यार्थियों और उपस्थित नागरिकों ने राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

