
नर्मदापुरम / पूर्णिमा का व्रत हिंदू धर्म में रखा जाने वाला एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण उपवास है, जो प्रत्येक हिंदू चंद्र मास के शुक्ल पक्ष के 15वें दिन यानी पूर्णिमा तिथि पर रखा जाता है. इस दिन चंद्रमा आकाश में अपनी सभी 16 कलाओं के साथ पूर्ण रूप में दिखाई देता है.यह व्रत मुख्य रूप से भगवान श्री हरि विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
पूर्णिमा व्रत का महत्व
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मानसिक शांति: ज्योतिषशास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। इस दिन व्रत और चंद्र देव की पूजा करने से मानसिक तनाव दूर होता है और मन शांत रहता है।
सुख-समृद्धि: इस तिथि पर भगवान सत्यनारायण (विष्णु जी) और लक्ष्मी जी की आराधना करने से घर की दरिद्रता दूर होती है और सुख-शांति आती है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण: पूर्णिमा के दिन पृथ्वी पर चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल सबसे अधिक होता है, जो मानव शरीर के चयापचय (metabolism) को संतुलित रखने और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने में मदद करता है।
व्रत की मुख्य विधि और नियम
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पूर्णिमा व्रत को सुबह सूर्योदय से लेकर रात में चंद्रमा के दर्शन होने तक रखा जाता है।
सुबह का नियम: प्रातः काल जल्दी उठकर स्नान करें और सूर्य देव को अर्घ्य दें. इसके बाद व्रत का संकल्प लें।
पूजा-अर्चना: घर के मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। इस दिन घरों में भगवान सत्यनारायण की कथा सुनना बेहद शुभ माना जाता है।
तुलसी माता को जल अर्पित करें और दीपक जलाएं।
शिवलिंग पूजन: चूंकि चंद्रमा का संबंध भगवान शिव से है, इसलिए इस दिन शिवलिंग पर कच्चा दूध, जल और काला तिल चढ़ाना बहुत फलदायी होता है।
दान-पुण्य: पूर्णिमा पर अन्न, वस्त्र या धन का दान करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है।
चंद्र दर्शन और अर्घ्य: शाम को जब पूर्ण चंद्रमा उदय हो, तब तांबे के लोटे में जल, अक्षत (चावल) डालकर चंद्र देव को अर्घ्य दें। चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत खोला जाता है।
भोजन नियम: दिन भर निराहार या फलाहार रहें। रात को चंद्र देव को भोग लगाने के बाद पंजीरी या सफेद खीर का प्रसाद ग्रहण करें। इस व्रत के भोजन में नमक और अनाज का परहेज किया जाता है, हालांकि आवश्यकता होने पर सेंधा नमक का उपयोग कर सकते हैं।
साल भर में कुल 12 पूर्णिमा तिथियां आती हैं, जिनमें कार्तिक पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा और गुरु पूर्णिमा जैसी तिथियों का विशेष धार्मिक महत्व है।(संकलन-प्रीति चौहान)

