
नर्मदापुरम / राजस्व विभाग द्वारा करोड़ों रुपए खर्च कर तैयार कराए गए एसएएआरए (स्मार्ट एप्लीकेशन फॉर रेवेन्यू एडमिनिस्ट्रेशन) ऐप की भारी तकनीकी खामी ने खरीफ सीजन की गिरदावरी को संकट में डाल दिया है। इस बार बिना किसी भौतिक सत्यापन के सैटेलाइट मैपिंग के जरिए गांवों के अधिकांश खसरों में सीधे मक्का की फसल दर्ज कर दी गई है, जबकि हकीकत में किसानों के खेतों में धान, सोयाबीन, मूंग, उड़द और मूंगफली जैसी फसलें लहलहा रही हैं। इस गंभीर विसंगति से जिला प्रशासन और भू-अभिलेख मुख्यालय भली-भांति अवगत हैं, लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी सॉफ्टवेयर स्तर पर कोई तकनीकी सुधार नहीं किया गया। अब इसका पूरा खामियाजा मैदानी अमले और किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
खेतों में करंट और जहरीले जीवों का खतरा, ऐप बना सिरदर्द…..
प्रशासनिक दबाव के चलते पटवारी और सर्वेयर भारी जोखिम उठाकर गिरदावरी पूरी करने में जुटे हैं। खरीफ में पानी और कीचड़ से भरे खेतों के बीच जाकर जियो-टैग्ड फोटो खींचने की बाध्यता है, जहां बिजली के तारों से करंट लगने और जहरीले जीव-जंतुओं का हमेशा डर बना रहता है। अन्य शासकीय योजनाओं और नियमित राजस्व कार्यों के भारी दबाव के बीच अमला एक-एक खसरे से गलत दर्ज मक्का की फसल हटाकर वास्तविक फसल अपडेट करने की मशक्कत कर रहा है।
पटवारियों में कार्रवाई का भय….
पटवारियों के सामने सबसे बड़ा संकट यह है कि ऐप की लगातार आ रही तकनीकी गड़बड़ियों के कारण यदि उनके द्वारा सुधारी गई फसल बैक-एंड या सिंक एरर से पुनः मक्का में बदल जाती है, तो उसकी जवाबदेही किस पर होगी। अमले का कहना है कि तकनीकी विफलता सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और एजेंसी की है, लेकिन गलती का ठीकरा हमेशा फील्ड स्तर पर छोटे कर्मचारियों पर फोड़कर उन पर निलंबन या नोटिस की कार्रवाई कर दी जाती है। यदि समय रहते गिरदावरी में फसलों का यह विवरण नहीं सुधरा, तो इसका सीधा असर लाखों किसानों पर पड़ेगा। गलत फसल दर्ज होने से किसानों को फसल बीमा क्लेम, आपदा की स्थिति में राहत राशि और समर्थन मूल्य पर उपार्जन पंजीयन में भारी नुकसान झेलना पड़ेगा। अब बड़ा सवाल यह है कि शासन करोड़ों की लागत वाले इस दोषपूर्ण सिस्टम और संबंधित एजेंसी पर जवाबदेही तय करेगा या हर बार की तरह मैदानी कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाकर मामले की इतिश्री कर ली जाएगी।
जिले में मक्का लगता ही नहीं….
नर्मदापुरम जिले में मक्का की फसल लगती नहीं है। इस क्षेत्र में धान, मक्का, उड़द की फसल ज्यादा रकबे में लगाई जाती है।
जिले में कोई मक्का लगता ही नहीं है और इसको एप के माध्यम से चढ़ा दिया है।
इनका कहना है…
सॉफ्टवेयर में स्टेट लेवल पर ही सुधार होगा। यह समस्या स्टेट लेवल की है । इसके लिए मॉनिटरिंग की जा रही है और जल्द ही इसमें किया जाएगा। इसके लिए लेटर भेजा जाएगा और फिर आगे की कार्रवाई होगी। पहली बार यह समस्या जिले में आई है।
सुरेखा यादव,
नायब तहसीलदार, नर्मदापुरम।

