

नर्मदापुरम / विकासखंड अकादमिक समन्वयक बीएसी एवं जनशिक्षकों सीएसी की पद पूर्ति और काउंसलिंग प्रक्रिया को लेकर जिले में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। शासकीय शिक्षक संगठन स्कूल शिक्षा सेवा मध्य प्रदेश के संभागीय अध्यक्ष राजेश कुमार पांडे ने कलेक्टर एवं जिला परियोजना समन्वय को ज्ञापन सौंपकर चयन प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता और नियमों का पालन करने की मांग की है। गौरतलब है कि राज्य शिक्षा केंद्र, भोपाल के निर्देशानुसार जिला शिक्षा केंद्र नर्मदापुरम द्वारा काउंसलिंग निरस्त कर दिया गया था।
संगठन की यह है मांगें….
प्रतिनियुक्ति की 4 वर्ष की सीमा और पद रिक्तता संगठन के अनुसार राज्य शिक्षा केंद्र और सामान्य प्रशासन विभाग के नियमानुसार प्रतिनियुक्ति की अधिकतम अवधि 4 वर्ष निर्धारित है। इसके बावजूद कई लोक सेवक पिछले 6 से 15 वर्षों से इन्हीं पदों पर जमे हुए हैं और स्वेच्छा से हटना नहीं चाहते। संगठन ने मांग की है कि ऐसे सभी लोक सेवकों को प्रतिनियुक्ति से मुक्त कर उनके मूल पदों पर वापस भेजा जाए तथा समस्त रिक्त पदों पर नए और पात्र लोक सेवकों को कार्य करने का अवसर दिया जाए। ब्लॉक एवं जनशिक्षा केंद्र में अनिवार्य बदलाव यदि चयन समिति पुराने लोक सेवकों को पुनः काउंसलिंग में सम्मिलित करने का निर्णय लेती है, तो संगठन ने शर्त रखी है कि बीएसी के पदों हेतु उनका विकासखंड तथा सीएसी के पदों हेतु उनका जनशिक्षा केंद्र अनिवार्य रूप से बदला जाना चाहिए। 52 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा का पालन राज्य शिक्षा केंद्र के निर्देशों का हवाला देते हुए ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि प्रतिनियुक्ति हेतु अधिकतम आयु सीमा 52 वर्ष निर्धारित की गई है। जो लोक सेवक 52 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं, वे इस पद की पात्रता नहीं रखते। अतः ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों को आगामी काउंसलिंग में किसी भी स्थिति में शामिल न किया जाए।
उच्च न्यायालय जाने की चेतावनी….
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि आगामी काउंसलिंग प्रक्रिया विधि अनुरूप, पारदर्शी और न्यायसंगत नहीं होती है, तो इसकी समस्त जवाबदारी विभाग प्रमुख की होगी। ऐसी स्थिति में शासकीय शिक्षक संगठन प्रक्रिया के विरुद्ध माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका दायर करने के लिए स्वतंत्र रहेगा। यह ज्ञापन आयुक्त राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल, आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय, आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग सहित सभी वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित किया गया है। चार वर्ष पूर्ण हो चुके हैं बगैर सूचना जारी किए हुए जिले के पदों को रिक्त करें बगैर जिला शिक्षा केंद्र में उनके द्वारा आवेदन पुनः भर्ती हेतु आवेदन प्रस्तुत किए गए । आवेदन जमा करने का लिखित पत्र ना तो प्रकाशित किया गया और ना ही वरिष्ठ अधिकारियों से मार्गदर्शन चाहा गया काउंसलिंग निरस्त होने के बाद प्रक्रिया को पार दर्शिता रखते हुए जिला शिक्षा केंद्र के द्वारा नोट शीट चलाकर कर कलेक्टर से अनुमति लेनी थी जो नहीं ली गई।

