
सिवनी मालवा / आगामी नगरीय निकाय चुनावों को लेकर सिवनी मालवा की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। नगर पालिका अध्यक्ष पद के संभावित आरक्षण को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है। मध्य प्रदेश शासन द्वारा अध्यक्ष एवं महापौर पदों के आरक्षण की प्रक्रिया प्रारंभ करने के लिए हाल ही में आदेश जारी किए जाने के बाद स्थानीय नेताओं, संभावित दावेदारों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की निगाहें अब आरक्षण सूची पर टिक गई हैं। माना जा रहा है कि आरक्षण की घोषणा के साथ ही चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
शासन ने शुरू की प्रक्रिया, बढ़ी राजनीतिक उत्सुकता….
नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार आगामी नगरीय निकाय चुनावों के लिए अध्यक्ष एवं महापौर पदों के आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि अभी अंतिम रोस्टर और आरक्षण सूची जारी नहीं हुई है, लेकिन प्रक्रिया प्रारंभ होने के साथ ही प्रदेशभर की नगर पालिकाओं की तरह सिवनी मालवा में भी संभावित आरक्षण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अध्यक्ष पद का आरक्षण केवल किसी एक नगर पालिका के पिछले रिकॉर्ड के आधार पर तय नहीं होता, बल्कि पूरे प्रदेश के नगर निकायों को शामिल करते हुए राज्य स्तरीय रोस्टर तैयार किया जाता है। इसके बाद विभिन्न वर्गों के लिए निर्धारित आरक्षण प्रतिशत के अनुसार सीटों का निर्धारण किया जाता है और अंततः लॉटरी अथवा ड्रॉ प्रक्रिया के माध्यम से नगर पालिकाओं को संबंधित श्रेणियां आवंटित की जाती हैं।
क्या कहता है सिवनी मालवा का आरक्षण इतिहास….
सिवनी मालवा नगर पालिका के पिछले चार चुनावी कार्यकालों का रिकॉर्ड कई दिलचस्प संकेत देता है। वर्ष 2004 में अध्यक्ष पद अनारक्षित महिला वर्ग के लिए आरक्षित था। इसके बाद 2009 में यह पद अनारक्षित श्रेणी में रहा। वर्ष 2014 में यह सीट अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) महिला के लिए आरक्षित हुई, जबकि 2022 में पुनः अनारक्षित श्रेणी के लिए आरक्षण निर्धारित किया गया।
लगभग दो दशक के इस रिकॉर्ड पर नजर डालें तो स्पष्ट होता है कि अनारक्षित और ओबीसी महिला वर्ग को प्रतिनिधित्व मिल चुका है। ऐसे में आगामी चुनाव में कौन-सी श्रेणी सामने आएगी, इसे लेकर राजनीतिक विश्लेषणों का दौर जारी है।
आरक्षण को लेकर क्यों बढ़ी उत्सुकता…..
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी प्रमुखता से हो रही है कि सिवनी मालवा नगर पालिका क्षेत्र में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की आबादी अपेक्षाकृत कम मानी जाती है। यही कारण है कि कई राजनीतिक पर्यवेक्षक संभावित आरक्षण के समीकरणों को ओबीसी अथवा महिला वर्ग के इर्द-गिर्द देख रहे हैं। हालांकि आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पूरी तरह राज्य स्तरीय रोस्टर और ड्रॉ पर आधारित होती है, इसलिए अंतिम निर्णय आने तक किसी भी संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता।
इसी बीच संभावित दावेदारों ने भी अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। सामाजिक कार्यक्रमों, जनसंपर्क अभियानों और विभिन्न संगठनों के आयोजनों में संभावित उम्मीदवारों की मौजूदगी बढ़ने लगी है। कई नेता आरक्षण की अंतिम घोषणा से पहले ही अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुट गए हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों की क्या है राय….
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिवनी मालवा का पिछला आरक्षण इतिहास आगामी निर्णय को लेकर कई संकेत जरूर देता है, लेकिन उसे अंतिम आधार नहीं माना जा सकता। उनका कहना है कि वर्ष 2014 में ओबीसी महिला और वर्ष 2022 में अनारक्षित आरक्षण होने के कारण इस बार नए वर्ग को अवसर मिलने की संभावना पर चर्चा स्वाभाविक है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि चूंकि नगर पालिका क्षेत्र में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या सीमित है, इसलिए स्थानीय स्तर पर ओबीसी और महिला वर्ग को लेकर चर्चाएं अधिक दिखाई दे रही हैं। हालांकि आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया में राज्य स्तर का संतुलन सबसे महत्वपूर्ण कारक होता है, इसलिए अंतिम निर्णय केवल आधिकारिक रोस्टर जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
चुनावी रणनीतियों पर पड़ेगा सीधा असर…..
आरक्षण की घोषणा का सबसे बड़ा प्रभाव संभावित उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों की रणनीति पर पड़ेगा। जिस वर्ग के लिए सीट आरक्षित होगी, उसी के अनुरूप उम्मीदवारों के नाम सामने आएंगे और चुनावी समीकरण बदल जाएंगे। यही कारण है कि राजनीतिक दलों के साथ-साथ निर्दलीय दावेदार भी आरक्षण सूची का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
क्या ओबीसी पुरुष या अनारक्षित महिला बन सकती है सीट?….
सिवनी मालवा नगर पालिका अध्यक्ष पद वर्ष 2014 में ओबीसी महिला और वर्ष 2022 में अनारक्षित श्रेणी के लिए आरक्षित रह चुका है। ऐसे में स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में दो संभावनाएं सबसे अधिक सुनाई दे रही हैं— ओबीसी और अनारक्षित महिला।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार यदि राज्य स्तरीय रोस्टर में ओबीसी वर्ग के लिए अवसर बनता है और महिला आरक्षण लागू नहीं होता, तो सीट ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित हो सकती है, जिससे ओबीसी पुरुष दावेदारों की संभावनाएं मजबूत होंगी। दूसरी ओर यदि महिला आरक्षण का चक्र लागू होता है और रोस्टर की स्थिति अनुकूल रहती है, तो अनारक्षित महिला श्रेणी भी एक संभावित विकल्प हो सकती है।
हालांकि यह केवल राजनीतिक आकलन हैं। अंतिम निर्णय शासन द्वारा जारी रोस्टर, आरक्षण सूची और ड्रॉ प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा। तब तक सिवनी मालवा की राजनीति में संभावनाओं, समीकरणों और दावेदारों को लेकर चर्चाओं का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

