
सिवनी मालवा / मां नर्मदा की सहायक नदी इंद्रावती के पुनर्जीवन के लिए मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद, सिवनी मालवा विकासखंड की नवांकुर संस्था “जीवनदायनी समाज सेवा समिति, गाजनपुर” और “ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति, झाड़वीड़ा” ने उद्गम से बराखड़ खुर्द तक विस्तृत सर्वे किया।
सर्वे दल ने सतपुड़ा पर्वत की गोद में बूढ़ी माई जंगल के झिरी खो स्थित इंद्रावती के उद्गम स्थल से यात्रा शुरू कर साधु बाबा, तेलादेव बाबा, राजलढाणा (सुल्तानपुर), पतलई ढाना, नयापुरा, झाड़वीड़ा और नाहरकोला कलां होते हुए सेक्टर-1 के बराखड़ खुर्द तक नदी की वर्तमान स्थिति देखी। रास्ते में तैलायी बाबा, साधु बाबा और मेलघाट बाबा जैसे आस्था केंद्रों के दर्शन भी किए गए। दल ने जल स्रोतों, प्रवाह क्षेत्र और आसपास के प्राकृतिक संसाधनों का बारीकी से अध्ययन किया।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इंद्रावती कभी बारहमासी बहती थी, अब सिर्फ बारिश में पानी रह गया है। घटते जलस्तर को देखते हुए समितियों ने संरक्षण और पुनर्जीवन की ठोस कार्ययोजना बनाने के लिए यह सर्वे किया।
समिति पदाधिकारियों ने बताया कि नर्मदा की सहायक नदियों की स्थिति का अध्ययन कर वृक्षारोपण, जल संरक्षण, जनजागरूकता और प्राकृतिक जल स्रोतों के संवर्धन पर विशेष काम किया जाएगा। सर्वे के आधार पर विस्तृत कार्ययोजना बनाकर धरातल पर काम शुरू किया जाएगा।
सर्वे का नेतृत्व जीवनदायनी समाज सेवा समिति के अध्यक्ष सुनील सिंगोरिया ने किया। टीम में संयुक्त सचिव काजल रघुवंशी, परामर्शदाता सेवनदास लौवंशी, रेवाशंकर सोलंकी, ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति झाड़वीड़ा के अध्यक्ष कालूराम प्रजापति, सचिव प्रेमनारायण राजपूत सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।
“सहायक नदियां बचेंगी, तभी मां नर्मदा का अस्तित्व और वैभव सुरक्षित रहेगा” — इसी संकल्प के साथ इंद्रावती संरक्षण अभियान अब गति पकड़ रहा है।

