

नर्मदापुरम / नर्मदे सर्वदे देवि स्वां गम्भीरगुणाढ़्याम् त्वदंग-रज-संस्पर्शात् पापिष्ठोऽपि विमुच्यते अर्थात् मां नर्मदा के पावन जल और उनकी माटी का स्पर्श मात्र भी मनुष्य का कल्याण कर देता है। इसी सनातन चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व को जीवंत करते हुए रविवार को स्थानीय चित्रगुप्त घाट (कोरी घाट) पर अखिल भारतीय कायस्थ समाज की मातृशक्ति एवं पुरुषों द्वारा एक वृहद स्वच्छता अभियान चलाया गया। समाज के प्रबुद्ध जनों ने केवल औपचारिकता नहीं निभाई, बल्कि स्वयं हाथों में झाड़ू थामकर घाट के फर्श से तिनका-तिनका कचरा चुना। नदी के आंचल और किनारों पर बिखरी पुरानी फूल-मालाओं तथा विसर्जित सामग्रियों को बाल्टियों और तगाड़ियों में भरकर डस्टबिन तक पहुंचाया। इस सेवा कार्य ने घाट पर मौजूद हर श्रद्धालु को गहराई से प्रेरित किया। विजय वर्मा ने कहा कि’शास्त्रों में अमर है मां नर्मदा का स्वरूप, इसे मैला करना पाप है । इस पुनीत अवसर पर उपस्थित प्रखर समाजसेवी एवं सुप्रसिद्ध भजन गायिका आशा राजपूत ने श्रमदान करते हुए मां नर्मदा के शास्त्रीय वैभव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा हमारे शास्त्रों और पुराणों में मां नर्मदा को केवल एक नदी नहीं, बल्कि साक्षात सायुज्य मोक्षदायिनी माना गया है। गंगा में स्नान करने से, यमुना का आचमन करने से, लेकिन रेवा (नर्मदा) के तो केवल दर्शन मात्र से मनुष्य का जीवन धन्य हो जाता है। यह ‘पुण्यसलिला’ अनादि काल से इस धरा को तृप्त कर रही हैं। किंतु, आज हमें आत्ममंथन करना होगा। जिस मां के आंचल में हम शांति पाते हैं, उसके घाटों पर कचरा फेंकना शास्त्रों के विरुद्ध और पाप के समान है। कायस्थ समाज की मातृशक्ति ने जो बीड़ा उठाया है, वह अनुकरणीय है। हमारा लक्ष्य केवल घाट साफ करना नहीं, बल्कि अपने नर्मदापुरम के नाम को देश में स्वच्छता के शिखर (नंबर वन) पर स्थापित करना है। इस पावन तट पर सेवा का अवसर मिलना मेरे जीवन का परम सौभाग्य है। सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी विजय वर्मा ने कहा’स्वच्छता ही सच्ची राष्ट्रसेवा और मां नर्मदा की वास्तविक पूजा है।
अभियान ले रहा आंदोलन का रूप…..
अभियान के सूत्रधारों में से एक, सेंट्रल बैंक के सेवानिवृत्त अधिकारी विजय वर्मा ने स्वच्छता को एक संस्कार के रूप में रेखांकित करते हुए कहा कि प्रत्येक रविवार को विभिन्न घाटों पर चलने वाला यह अभियान अब एक आंदोलन का रूप ले रहा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से मार्मिक अपील करते हुए कहा स्वच्छता केवल एक आदत नहीं, बल्कि यह हमारी चेतना का विस्तार है। ‘स्वच्छता में ही ईश्वर का वास होता है’ और मां नर्मदा के घाटों को स्वच्छ रखना ही उनकी सबसे सच्ची पूजा है। जब हम आस्था के नाम पर प्लास्टिक, निर्माल्य (बासी फूल-माला) और पूजन सामग्री सीधे जल में प्रवाहित करते हैं, तो हम अनजाने में अपनी ही जीवन दायिनी को आघात पहुंचाते हैं।”श्रद्धालुओं से मेरा करबद्ध निवेदन है कि घाटों पर बने डस्टबिन का ही उपयोग करें। नदी के पारिस्थितिक तंत्र को बचाना हम सबका सामूहिक दायित्व है। आज इस अभियान में समाज के सभी वर्गों के लोग, युवा और बुजुर्ग एक साथ जुड़ रहे हैं, जो इस बात का प्रतीक है कि जागरूकता की यह अलख अब बुझने वाली नहीं है।” श्रमदान की इस पावन बेला में साक्षी रहे नगर के प्रबुद्ध जन इस प्रेरक स्वच्छता अभियान में समाज की मातृशक्ति और पुरुषों ने कंधे से कंधा मिलाकर अपनी सहभागिता दर्ज कराई। इस सेवा कार्य में मुख्य रूप से पुरुष नेतृत्व नगर पालिका उपाध्यक्ष अभय वर्मा, विजय वर्मा, सुनील राय, सीबी खरे, मनोज वर्मा, आदित्य, संतोष रावत, राम भदोरिया एवं लालता प्रसाद। मातृशक्ति का संबल ज्योति वर्मा, प्रीति खरे, मंजू श्रीवास्तव, रितु श्रीवास्तव, ममता तिवारी, जानकी, अनीता वर्मा, आशा राजपूत एवं अदिति वर्मा। अभियान के अंत में सभी उपस्थित जनों ने यह संकल्प लिया कि मां नर्मदा के गौरव और नर्मदापुरम की सुंदरता को अक्षुण्ण रखने के लिए जन-जागरूकता का यह अभियान अनवरत रूप से चलता रहेगा।

