17 से खरमास होगा शुरू,15 जून तक नहीं होंगे शुभ कार्य
गर्मी के चलते भगवान को शीतलता देने लगे कूलर एसी
दयाराम फौजदार रिपोर्टर नर्मदापुरम।
मलमास 17 मई से शुरू होगा। इसके चलते मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी। 15 जून तक शहनाइयां नहीं गूंजेंगी। ज्योतिषाचार्य पंकज पाठक ने बताया कि इस महीने में सूर्य किसी भी राशि में प्रवेश नहीं करते इसलिए इसे खरमास कहा जाता है और इसमें कोई शुभ कार्य नहीं होते। इसे पुरुषोत्तम मास कहते हैं। विवाह, सगाई, गृहप्रवेश, भवन-गृह निर्माण प्रतिष्ठा अष्टका श्राद्ध , उपनयन मुंडन , जनेऊ संस्कार व्रतों का आरंभ-उत्सर्ग-उद्यापन आदि वर्जित कहे गये हैं। आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसके शास्त्रीय कारण प्रमुख रूप से पौराणिक कथाओं और ज्योतिषीय गणना पर आधारित हैं। शास्त्रों के अनुसार सौर वर्ष और चंद्र वर्ष में अंतर लगभग 11 दिन को पाटने के लिए हर तीसरे वर्ष एक अतिरिक्त महीना आता है। भारतीय ज्योतिष में बारह महीनों के बारह देवताओं जैसे सूर्य, विष्णु, शिव को स्वामी माना गया है। चूंकि यह अतिरिक्त मास अधिक मास होता है, इसलिए इसका कोई स्वामी देवता नहीं था। श्री पाठक ने बताया कि स्वामी न होने के कारण इसे पहले ‘मल मास’ या ‘अशुद्ध मास’ माना जाता था, जिससे इसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता था।
पौराणिक कथा के अनुसार, जब मल मास की दुर्दशा हुई, तो वह भगवान विष्णु के पास गया। विष्णु जी ने कहा, “अब से मैं इस महीने का स्वामी हूं और इसे ‘पुरुषोत्तम मास’ के रूप में जाना जाएगा,”। हालांकि, इसका स्वभाव ‘मलमास’ वाला ही रहा, जिससे मांगलिक कार्य वर्जित माने गए।
ज्योतिषी दृष्टि से सूर्य संक्रांति का अभाव-श्री पाठक
जब किसी महीने में सूर्य राशि परिवर्तन नहीं करते सूर्य संक्रांति नहीं होती तो उसे ‘मलमास’ या ‘खरमास’ कहा जाता है। पुरुषोत्तम मास में सूर्य किसी भी राशि में प्रवेश नहीं करते। इस महीने में यह प्रक्रिया नहीं होती, इसलिए इसे मांगलिक कार्यों के लिए दोषपूर्ण माना जाता है। पुरुषोत्तम मास का उद्देश्य सांसारिक सुख-सुविधाओं की शुरुआत करने के बजाय स्वयं को भगवान विष्णु की पूजा, दान, व्रत, और धर्म-कर्म में लगाना है।
मंदिरों में भगवान को मिल रही शीतलता
वहीं इधर शहर के विभिन्न मंदिरों में गर्मी के चलते भगवान को शीतलता देने एसी, कूलर चल रहे हैं। भगवान को हल्की और सफेद परिधान का श्रृंगार किया जा रहा है। शहर के खेड़ापति हनुमान मंदिर, बांके बिहारी मंदिर, सतरस्ता काली मंदिर, काले महादेव मंदिर, जुमेराती महाकाली मंदिर, ग्वालटोली काली मंदिर , हनुमान मंदिर, श्री साईं मंदिर सहित अन्य जगह पंखे कूलर एसी की व्यवस्था की गई है । इसके साथ ही फूलों से श्रृंगार किया जा रहा है। कूलर पंखे लगे से भगवान को शीतलता मिल रही है।

