विभिन्न धाराओं के चलते दर्ज किया केस, शुरू की जांच
दयाराम फौजदार रिपोर्टर नर्मदापुरम।
शहर के सिक्योरिटी पेपर मिल में हुए मेडिक्लेम घोटाले को लेकर सीबीआई ने डॉक्टरों , मेडिकल संचालकों और कर्मचारियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सीबीआई ने इन पर केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है । बताया जाता है कि सतर्कता अधिकारियों ने इस मामले में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। एसपीएम में 2022 और 23 के दौरान मेडिक्लेम में 6 करोड़ 4 लाख 20 हजार रुपए निकाले गए थे। यह राशि अधिक है । बताया जाता है कि बच्चों के नाम पर और बढ़े हुए बिल बनाकर राशि निकाली गई थी। फर्जी मेडिक्लेम की भारी रकम का भुगतान किया गया । सीबीआई ने विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
प्रारंभिक जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं आई
सतर्कता विभाग द्वारा की गई जांच में पूरा मामला सामने आया था। मेडिकल बिल प्रतिपूर्ति के रूप में खर्च की गई, जो सामान्य मानकों की तुलना में असामान्य रूप से बहुत अधिक पाई गई। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि कुछ कर्मचारी लगातार हर महीने भारी-भरकम मेडिकल बिल प्रस्तुत कर रहे थे, जबकि वे नियमित रूप से कार्यालय आ रहे थे और सामान्य रूप से कार्यरत थे। अधिकांश दावे एक ही डॉक्टर से जुड़े पाए गए, जो उस समय यूनिट में संविदा पर मेडिकल ऑफिसर के रूप में कार्यरत थे। उनके कार्यमुक्त होने के बाद ऐसे दावों में तत्काल कमी देखी गई। अधिकांश मेडिकल बिल केवल दो केमिस्ट दुकानों से जुड़े थे। कई बिल नकद भुगतान, बढ़ी हुई कीमतों और
29.82 लाख के मेडिकल दावों की विस्तार से जांच
बीमारी या दवाओं की वास्तविक खपत से जुड़े आवश्यक मेडिकल दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा सके। इससे सरकारी उपक्रम को वित्तीय नुकसान होने की पुष्टि हुई।
सीबीआई जांच के साथ-साथ संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई मेडिकल दावों का तृतीय पक्ष से सत्यापन और अतिरिक्त भुगतान की वसूली की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
इन पर सीबीआई ने दर्ज किया केस
इस मामले में जलील खान , सिद्धेश्वर महापात्रा, मुकेश कुमार उइके , राजेश कुमार मालवीय , कुंदन कुमार , सुमन , मुकेश बग्गन , दीपक मेहर , योगेश साहू ,जगदीश प्रसाद और मुरारी लाल मेहर कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। वहीं डॉक्टर जितेंद्र मालवीय और मुकेश मेडिकोज और सांवरिया मेडिकल पर मामला दर्ज किया गया।
