नर्मदापुरम / शासन के निर्देशानुसार शासकीय गृहविज्ञान स्नातकोत्तर अग्रणी महाविद्यालय में स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के तत्वाधान में अल्पावधि रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण के अंतर्गत खाद्य परिरक्षण का एक माह का प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्रशिक्षण हेतु विशेषज्ञ के रूप में श्रीमती प्रियंका मालवीय और रजनी गौर को आमंत्रित किया गया जिन्हें खाद्य परिरक्षण में कई वर्षों का अनुभव है एवं इस क्षेत्र में स्वयं का स्वरोजगार भी स्थापित है।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. श्रीमती कामिनी जैन ने बताया कि खाद्य संरक्षण का प्रशिक्षण वर्तमान समय में स्वरोजगार का एक बहुत अच्छा साधन है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से छात्राएं खुद का व्यवसाय शुरू कर सकती हैं और आत्मनिर्भर बन सकती हैं। खाद्य परिरक्षण विधियों का महत्व प्राचीन काल से हो रहा है। सुखना, तेल, शक्कर और नमक से खाद्य परिरक्षण हम करते आ रहे हैं। खाद्य परिरक्षण भोजन सुरक्षा, पोषण, आर्थिक विकास और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। आधुनिक तकनीकों के साथ पारंपरिक विधियों का समन्वय समाज के लिए लाभकारी सिद्ध होता है। खाद्य परिरक्षण न केवल कृषकों की आय बढ़ाता है बल्कि यह युवाओं के लिए एक आधुनिक और लाभदायक कैरियर विकल्प भी है। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र भारत में सबसे तेजी से बढ़ते उद्योगों में से एक है, जो स्वरोजगार और नौकरी के व्यापक अवसर प्रदान करता है। खाद्य परिरक्षण न केवल भोजन को खराब होने से बचाने की एक तकनीक है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। श्रीमती प्रियंका मालवीय एवं रजनी गौर ने बताया कि इस एक माह के प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं को खाद्य संरक्षण के प्रमुख उत्पाद जैसे फल आधारित, सब्जियां आधारित, अनाज आधारित, सूखे उत्पाद के निर्माण में प्रशिक्षित किया जाएगा। जिसमें जैम, जैली, अचार, सॉस, पापड़ आदि कई उत्पाद बनाए जाएंगे। छात्राएं इस प्रशिक्षण के उपरांत स्वयं का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं, इसके लिए सर्वप्रथम उत्पाद का चयन करना होगा, कच्चे माल की व्यवस्था सुनिश्चित करना होगी, साफ सफाई व गुणवत्ता पर ध्यान देना होगा। पैकेजिंग और लेबलिंग की प्रक्रिया को समझना होगा और अंतिम चरण में स्थानीय एवं ऑनलाइन मार्केटिंग के माध्यम से अपने उत्पाद का विक्रय करना होगा। स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ की जिला नोडल अधिकारी डॉ. संगीता अहिरवार ने छात्राओं को शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि छात्राएं इसमें प्रशिक्षित होकर लगातार बढ़ती मांग के कारण स्थायी रोजगार प्राप्त कर सकती है, अपनी सामाजिक पहचान बना सकती है और आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती है। महाविद्यालय में यह प्रशिक्षण 30 दिवस तक संचालित किया जाएगा जिसमें छात्राओं को खाद्य संरक्षण की विभिन्न तकनीकों से अवगत कराया जाएगा। खाद्य संरक्षण कम पूंजी, घरेलू स्तर पर शुरू होने वाला और लाभकारी स्वरोजगार का एक महत्वपूर्ण साधन है इसके अंतर्गत फलों, सब्जियों, अनाज एवं दुग्ध उत्पादों को सुरक्षित रखकर उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाई जाती है और बाजार में बेचा जाता है।
महाविद्यालय की ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट अधिकारी डॉ. रागिनी सिकरवार द्वारा छात्राओं को स्वयं का उद्यम खोलने के लिए सरकार की विभिन्न योजनाओं एवं लोन संबंधी जानकारी प्रदान की गई । खाद्य संरक्षण न केवल रोजगार सृजन का सशक्त माध्यम है बल्कि यह स्थानीय संसाधनों का उपयोग, पोषण सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वरोजगार का उत्तम साधन बन सकता है। इस अवसर पर वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. रश्मि श्रीवास्तव, डॉ. हर्षा चचाने, डॉ. रीना मालवीय, डॉली गठोले, सोनम केवट एवं भारी संख्या में महाविद्यालय की छात्राएं उपस्थित रहीं।

