नर्मदापुरम / शासकीय गृहविज्ञान स्नातकोत्तर अग्रणी महाविद्यालय में आज दिनांक 04.12.2025 को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ.श्रीमती कामिनी जैन के मार्गदर्शन में प्रारंभ हुआ। प्राचार्य डॉ.श्रीमती कामिनी जैन ने बताया कि मशरूम कल्चर आज कृषि, पोषण, रोजगार और पर्यावरण चारों क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। भूमिहीन कृषिकों के लिए आर्थिक रूप से स्वावलंबन का महत्वपूर्ण साधन है। प्राचार्य डॉ. जैन ने बताया कि महाविद्यालय में विगत 12-13 वर्षों से मशरूम उत्पादन किया जा रहा है। महाविद्यालय के प्राध्यापक, तकनीशियन मशरूम उत्पादन के लिए प्रशिक्षित हो चुके हैं, पिछले वर्ष से जिला जेल में डिप्टी जेलर श्री पांडे ने महाविद्यालय की टीम द्वारा कैदियों को मशरूम उत्पादन प्रक्रिया से अवगत कराया है। इस वर्ष भी केदियों के लिए प्रशिक्षण कराया जाएगा। प्राचार्य डॉ. जैन ने बताया कि महाविद्यालय में ऑयस्टर मशरूम का उत्पादन किया जाता है। जिसमें लागत कम और लाभ अधिक है। पोषण के दृष्टिकोण से मशरूम प्रोटीन, फाइबर, विटामिन बी कांपलेक्स और विटामिन डी एवं खनिज पदार्थ का उत्कृष्ट स्रोत है। इसमें कम कैलोरी कम वसा और कोलेस्ट्रॉल नहीं होता है। मशरूम कल्चर एक लघु उद्योग का रूप ले चुका है। मशरूम का मूल्य संवर्धित उपयोग सूप, अचार, सूखे ताजे रूप में किया जाता है। होटल रेस्टोरेंट और फास्ट फूड उद्योग में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मशरूम की मांगे तेजी से बढ़ रही है। श्रीमती प्रीति ठाकुर के मार्गदर्शन में मशरूम उत्पादन की प्रक्रिया की जा रही है। श्रीमती प्रीति ठाकुर ने बताया कि छात्राएं इस परियोजना के रूप में भी सीख रही है। इस अवसर पर डॉ. हर्षा चचाने, डॉ. संगीता अहिरवार, डॉ. रीना मालवीय, कु.स्वेता वर्मा, महाविद्यालयीन स्टाफ एवं भारी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।

