





नर्मदापुरम / गुप्ता ग्राउंड में चल रही श्री राम कथा के समापन के अवसर पर आचार्य कौशिक जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए केवट संवाद भारत संवाद सहित भगवान राम की लीलाओं का वर्णन किया। कौशिक जी महाराज ने कहा कि हमारे जीवन का समाधान गुरु करता है, भाई की ताकत के बिना रावण जब नीचे गिर गया तब दान धर्म का पालन करें। जरूरतमंद की मदद करें अमावस्या पर भी तेल की दिए जलाएं प्रणाम करें, यह उपाय जीवन की समस्या को दूर करने का और सुख शांति लाने के लिए बताए गए। महाराज ने कहा कि गरीबों की सेवा और जरूरतमंदों के काम आने वाली चीज महत्वपूर्ण होती है। धर्म और सत्कर्म पर खर्च किया गया, धन कभी काम नहीं होता । महाराज ने कहा भारत में अयोध्या लौटने से मना करने पर भगवान राम के चरण पादुका अपने मस्तक पर रखकर अयोध्या लौटे जो उनके राम के प्रति अटूट प्रेम और समर्पण को दर्शाता है। आचार्य कौशिक जी महाराज ने केवट संवाद, भारत संवाद और भगवान राम की लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जीवन का समाधान गुरु करता है, दान-धर्म करें, जरूरतमंदों की मदद करें, अमावस्या पर तेल के दिए जलाएं। महाराज ने कहा – राम का चरित्र सत्य, धर्म और कर्तव्य पालन की शिक्षा देता है। हनुमान जी की संजीवनी बूटी की घटना, भरत का राम के प्रति प्रेम, और अयोध्या वापसी का भव्य वर्णन किया। श्री राम का चरित्र हमें सत्य धर्म और कर्तव्य के पालन शिक्षा देता है उनका जीवन हमें सिखाता है कि कैसे हर परिस्थिति में ध्यान रखें मर्यादा का पालन करें और अपने लक्ष के प्रति समर्पित रहे उनका चरित्र हमें आदर्श भाई पुत्र राजा और मित्र बनने का मार्ग दिखाता है। श्री राम ने हर परिस्थितियों में सत्य और धर्म के रास्ते पर चलना सिखाया है। राम केवल राजा नहीं बल्कि मर्यादा पुरुषोत्तम है उनका चरित्र वीरता करोड़ों त्याग भक्ति और न्याय जैसे सभी गुना का एक आदर्श मिश्रण है महाराज ने कहा कि हनुमान जी ने लक्ष्मण के जीवन की रक्षा के लिए सजनी बूटी लाई थी। मेघनाथ के घायल करने के बाद जब लक्ष्मण मूर्छित हो गए तो हनुमान जी ने संजीवनी बूटी लाने के लिए दौड़ना गिरी पर्वत को उठाया और उसे लेकर आए, जिससे लक्ष्मण जी को होश आया। 14 वर्ष वनवास और लंका पति रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद भगवान राम माता सीता और लक्ष्मण हनुमान व अन्य सहयोगियों के साथ पुष्कर विमान से अयोध्या लोट भारत को जब यह समाचार मिला कि प्रभु राम वापस आ रहे हैं, तो वह अयंत हर्षित हो गए और अपने दुख सुख भूल गए। जैसे प्यासे को अमृत मिल गया हो वह तुरंत गुरु वशिष्ठ और सभी माता को समाचार सुनने गए नगर में सूचना जंगल की आज की तरह फैल गई। सभी स्त्री, पुरुष, बूढ़े, बच्चे हर्षित होकर दौड़ पड़े। प्रभु का आगाज जब पुष्कर विमान अयोध्या में उतरा तो सभी माताए प्रभु का कमल जैसे सुख देखकर भाव विभोर हो गई। उनके नेत्रों में प्रेम के आंसू वह निकले अयोध्या पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत और राज अभिषेक हुआ जिसके बाद रामराज की स्थापना हुई। जिससे एक स्वर्ण युग माना जाता है, महाराज ने कहा कि यह प्रसंग सत्य की असत्य पर विजय धर्म की स्थापना और कर्तव्य पालन के बाद घर वापसी का प्रतीक है। हर व्यक्ति को भगवान राम की भक्ति करना चाहिए और भगवान का स्मरण करना चाहिए। गुरुवार प्रातः 5:00 बजे से यह कथा प्रारंभ हुई थी जो आज विराम दिवस पर समापन हुआ है श्री महाराज जी ने खूब आशीर्वाद दिया और कहा कि मां नर्मदा के इस पावन तट पर भगवान राम की कथा का श्रवण करने वाले सभी भक्तजन ने प्रतिदिन कथा का श्रवण किया यह सब बधाई के पात्र हैं।

