
नर्मदापुरम / मंगलवार को सोहागपुर विधायक विजयपाल सिंह ने भोपाल विधानसभा में कीर समाज के उत्थान के लिए उठाया प्रश्न। विधायक विजयपाल सिंह ने कहा कि कीर समाज को पुनः ‘स्वतंत्र जाति’ के रूप में सूचीबद्ध किया जाए। विधायक विजयपाल सिंह ने विधानसभा सत्र में बताया कि मध्यप्रदेश के 22 जिलों में निवासरत कीर समाज का पारंपरिक एवं मुख्य व्यवसाय सदैव से कृषि कार्य, कृषि मजदूरी, नदियों में डंगरवाड़ी तथा सब्ज़ियों का उत्पादन रहा है। कीर समाज का जीवन, संस्कृति और आर्थिक आधार इन्हीं व्यवसायों के इर्द-गिर्द सदियों से स्थापित है। मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग की पूर्व सूची में कीर समाज को 21वें क्रमांक पर स्वतंत्र जाति के रूप में उल्लेखित किया गया था, जिसमें समाज के वास्तविक और पारंपरिक व्यवसाय—कृषि एवं कृषि मजदूरी—स्पष्ट रूप से दर्ज थे। किन्तु, मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग की वर्तमान सूची में कीर समाज को क्रमांक 12 पर प्रतिस्थापित कर ढीमर, भोई, कहार, धीवर/मल्लाह/नावड़ा, तुरहा, केवट (कश्यप, निषाद, राजकुमार, बाथम), कीर व्रितिया, सिंगरहा, जालारी तथा सोंधिया जातियों के साथ जोड़ा गया है तथा व्यवसाय में मछली पकड़ना, नाव चलाना, पालकी ढोना, घरेलू सेवा, सिंघाड़ा/कमलगट्टा उत्पादन, पानी भरना आदि व्यवसायों का उल्लेख किया गया है—जबकि कीर समाज इन व्यवसायों का किसी भी क्षेत्र में निर्वाह नहीं करती है। यह तथ्यात्मक त्रुटि न केवल कीर समाज की सांस्कृतिक एवं आर्थिक पहचान को विकृत करती है, बल्कि समाज को प्रशासनिक स्तर पर अनावश्यक भ्रम एवं असंगतियों का सामना भी करना पड़ रहा है। अतएव, कीर समाज शासन एवं संबंधित विभागों से विनम्र अनुरोध करती है कि कीर समाज को पुनः ‘स्वतंत्र जाति’ के रूप में सूचीबद्ध किया जाए और व्यवसाय श्रेणी में केवल वास्तविक पारंपरिक व्यवसाय जैसे कृषि, कृषि मजदूरी, डंगरवाड़ी, सब्ज़ी उत्पादन का ही उल्लेख किया जाए। विधायक विजयपाल सिंह ने सत्र में कहा कि कीर समाज की यह मांग उसके इतिहास, परंपरा, आजीविका एवं सामाजिक पहचान के संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

