
नर्मदापुरम / धनवंतरी जयंती प्रति वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाती है, जिसे धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
तिथि…
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धनवंतरी जयंती (धनतेरस) 6 नवंबर, शुक्रवार
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि।
महत्व…
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• स्वास्थ्य की कामना: यह पर्व हमें यह संदेश देता है कि दुनिया में धन से ज्यादा मूल्यवान ‘आरोग्य’ (अच्छा स्वास्थ्य) है।
• चिकित्सकों के लिए विशेष दिन: डॉक्टर और वैद्य वर्ग इस दिन विशेष रूप से भगवान धन्वंतरि की पूजा कर बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का संकल्प लेते हैं।
• धन और आरोग्य का संगम: इस दिन माता लक्ष्मी और कुबेर के साथ-साथ भगवान धन्वंतरि की भी पूजा होती है, ताकि घर में सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य बना रहे।
धन्वंतरि प्रकटोत्सव की कथा (समुद्र मंथन)…
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पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में जब देवताओं और असुरों के बीच अमरता (अमृत) प्राप्त करने के लिए क्षीरसागर का समुद्र मंथन किया जा रहा था।
इस मंथन के दौरान कुल 14 रत्न निकले थे। मंथन के अंतिम चरणों में भगवान धन्वंतरि एक हाथ में अमृत से भरा कलश और दूसरे हाथ में आयुर्वेद का ग्रंथ लेकर प्रकट हुए थे। जिस तिथि को वे प्रकट हुए थे, वह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि थी। इसी कारण इस दिन को भगवान धन्वंतरि के प्रकटोत्सव या जयंती के रूप में मनाया जाता है। (संकलन – प्रीति चौहान)

