

नर्मदापुरम / माँ नर्मदा के तटों और मार्गों पर आस्था के अनेक रूप देखने को मिलते हैं, लेकिन इस बार सड़क से गुजरने वाले हर व्यक्ति की निगाहें एक ऐसे संत पर टिक गईं जो शारीरिक सीमाओं को चुनौती देते हुए आगे बढ़ रहे हैं। यह तपस्वी संत सामान्य रूप से चलने के बजाय, अपने पैर ऊपर हवा में उठाकर केवल हाथों के बल चलकर पावन नर्मदा परिक्रमा पूरी कर रहे हैं। हाल ही में वे सेमी रिटर्न चौराहे को पार करते हुए पुलिस लाइन मार्ग की दिशा में आगे बढ़े। संत बिना किसी विश्राम के, पूरी एकाग्रता के साथ अपने ही तय किए रास्ते पर निरंतर अग्रसर हैं।
देश की खुशहाली के लिए वर्षों की कठिन साधना संत की यह तपस्या किसी तात्कालिक संकल्प का हिस्सा नहीं है, बल्कि वे वर्षों से इसी कठोर नियम का पालन करते आ रहे हैं। उनके इस त्याग और शारीरिक श्रम के पीछे केवल एक ही उद्देश्य है संपूर्ण भारतवर्ष की खुशहाली, शांति और जनकल्याण की कामना शीर्षासन जैसी मुद्रा में हथेलियों के सहारे शरीर का संतुलन बनाए रखते हुए वे धीरे-धीरे अपने गंतव्य की ओर बढ़ते जा रहे हैं।
दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु, ‘नर्मदे हर’ से गूंजा मार्ग…..
जैसे ही संत सड़क से गुजरे, राहगीर, स्थानीय दुकानदार और नागरिक आश्चर्यचकित होकर रुक गए। अपने मार्ग पर शांत भाव से बढ़ रहे संत के दर्शन के लिए लोगों की भीड़ लग गई। श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया और मार्ग ‘नर्मदे हर’ के जयकारों से गूंज उठा।

