
नर्मदापुरम / सिवनी मालवा /कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक करवा चौथ पर्व नगर सहित अंचल में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। पति की लंबी उम्र और दांपत्य जीवन में सुख-शांति की कामना को लेकर सुहागन महिलाओं ने दिनभर निर्जला व्रत रखा। मान्यता है कि इस व्रत को करने से पति की आयु लंबी होती है और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
इस दिन विवाहित महिलाओं के सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व होता है। सुबह से ही महिलाओं ने सज-संवर कर व्रत की शुरुआत की और दिनभर व्रत कथा सुनकर पूजन किया। शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद महिलाओं ने छलनी की ओट से पहले चांद और फिर पति को देखकर अर्घ्य दिया और व्रत का पारण किया।
परंपरा के बारे में जानकारी देते हुए इंजीनियर आरुषी राठी ने बताया कि मान्यता के अनुसार जिस वर्ष लड़की का विवाह होता है, उस वर्ष उसके मायके से बयाने के रूप में व्रत-पूजन का सामान भेजा जाता है। नवविवाहिता अपने मायके से आए सामान से ही अपना पहला करवा चौथ व्रत शुरू करती है। इस बयाने में मिट्टी के करवे, वस्त्र, बर्तन, पैसे और पति के लिए वस्त्र के साथ पीतल या चांदी का करवा होना अनिवार्य माना जाता है।
उन्होंने बताया कि यह व्रत सुहागन महिलाओं के अटूट विश्वास, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है, जिसे वे पूरे दिन बिना अन्न-जल ग्रहण किए अत्यंत कठिन नियमों के साथ करती हैं।

