
नर्मदापुरम / कलेक्टर नर्मदापुरम आशीष वशिष्ठ के मार्गदर्शन में बुधवार को विधिक सेवा प्राधिकरण नर्मदापुरम के सभाकक्ष में समेकित बाल संरक्षण योजना ‘मिशन वात्सल्य’ के तहत एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में दत्तक ग्रहण, स्पॉन्सरशिप, फॉस्टर केयर, प्रत्यावर्तन, पुनर्वास और सामाजिक एकीकरण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नरसिंह गहलोत, जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री अभय सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास आशीष सिंह, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष शैलेंद्र कौरव, किशोर न्याय बोर्ड सदस्य, बाल कल्याण समिति सदस्य, शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस विभाग और विशेष किशोर पुलिस इकाई के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
प्रशिक्षण में बाल संरक्षण अधिकारी आशु पटेल ने मिशन वात्सल्य के घटकों की कानूनी और व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दत्तक ग्रहण के लिए कारा (CARA) पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है, इसके बाद जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा गृह अध्ययन रिपोर्ट तैयार की जाती है। बाल कल्याण समिति जांच के बाद बच्चे को कानूनी रूप से दत्तक ग्रहण के लिए स्वतंत्र घोषित करती है और अब जिला मजिस्ट्रेट द्वारा दत्तक ग्रहण आदेश जारी किया जाता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल, सोशल मीडिया या बिचौलियों के माध्यम से सीधे बच्चा गोद लेना पूरी तरह अवैध और दंडनीय है। स्पॉन्सरशिप, फॉस्टर केयर और पुनर्वास प्रक्रिया को भी सरल भाषा में समझाया गया।
कार्यशाला में बाल देखरेख संस्थाओं के कर्मचारी, पर्यवेक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और जिला बाल संरक्षण इकाई के अधिकारियों ने भाग लिया और जिले में बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।

