

नर्मदापुरम / शरद पूर्णिमा के शुभ अवसर पर रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की चाफेकर एवं परशुराम बस्ती, रसूलिया में पथ संचलन का आयोजन किया गया। सायं 4 बजे एसपीएम के 4 नंबर गेट स्थित श्री प्राचीन मंदिर परिसर में स्वयंसेवकों ने शस्त्र पूजन किया। इसके पश्चात प्रमुख मार्गों से पथ संचलन निकाला गया। नगरवासियों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। प्रातः के समय एक अन्य पथ संचलन अहिल्या बस्ती का डिवाइन सिटी परिसर से निकला।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह संघचालक चंद्रविजय गोस्वामी, अध्यक्षता कर रहे सेवानिवृत्त सिक्योरिटी पेपर मिल विभाग एवं वरिष्ठ समाज सेवी मधुसूदन शर्मा तथा मुख्य वक्ता के रूप में प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ एवं मध्यभारत प्रांत, भोपाल से पधारे डॉ. राजेश सेठी मंचासीन रहे।
राष्ट्र निर्माण के लिए समाज की सहभागिता आवश्यक….
मुख्य वक्ता डॉ. राजेश सेठी ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्र चेतना, सामाजिक समरसता, स्वदेशी भाव और संगठन के प्रति अटूट विश्वास के माध्यम से ही भारत को परम वैभव तक पहुंचाया जा सकता है। आज आवश्यकता है कि प्रत्येक नागरिक राष्ट्र के लिए जीने, समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने और देश की सांस्कृतिक विरासत को सशक्त बनाने का संकल्प ले। राष्ट्र निर्माण केवल शासन या किसी एक संगठन का दायित्व नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सहभागिता से ही यह लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का भाव भारतीय संस्कृति का मूल आधार है। भारतीय चिंतन में प्रत्येक प्राणी में ईश्वर का वास माना गया है तथा सभी के प्रति सम्मान और कल्याण की भावना निहित है। राष्ट्रीयता हमारा विचार है और समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर चलना हमारी सांस्कृतिक परंपरा रही है। छत्रपति शिवाजी महाराज एवं गुरु नानक देव जी के जीवन और विचारों से प्रेरणा लेकर समाज में सेवा, साहस और समरसता के भाव को सुदृढ़ करना चाहिए।
अनुशासन, सेवा और समर्पण से सशक्त होता है संगठन…..
डॉ. सेठी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1925 में एक शाखा से प्रारंभ हुआ संघ आज भी अपने ध्येय के प्रति निरंतर अग्रसर है। समय-समय पर संगठन की कार्यपद्धति पर प्रश्न उठाए गए, लेकिन संघ ने अपने विचार, अनुशासन और सेवा कार्यों के माध्यम से अपनी यात्रा जारी रखी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र को परम वैभव तक पहुंचाने के लिए समाज परिवर्तन के कार्यों में निरंतर जुटे रहना आवश्यक है।
उन्होंने भारतीय समाज की परंपरा में सेवा, त्याग और परोपकार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय इतिहास में ऋषिकाओं का योगदान, नदियों के प्रति मातृभाव तथा सामाजिक जीवन में नारी के सम्मान की परंपरा हमारी सांस्कृतिक चेतना को प्रदर्शित करती है। समाज को जातिगत और आर्थिक भेदभाव से ऊपर उठकर एकता एवं सामाजिक समरसता की दिशा में कार्य करना चाहिए।
स्वदेशी और आत्मनिर्भरता से सशक्त होगा भारत…..
राष्ट्र की सुरक्षा, सामर्थ्य और आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए डॉ. सेठी ने कहा कि वर्तमान समय भारत के लिए अनेक अवसर लेकर आया है। देश को अधिक सक्षम, आत्मनिर्भर और जागरूक बनाने के लिए प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग, स्वदेशी भाव का प्रसार और राष्ट्रीय चेतना का विस्तार इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों के बलिदान का स्मरण करते हुए मदनलाल ढींगरा, चापेकर बंधुओं और रामप्रसाद बिस्मिल जैसे वीर क्रांतिकारियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन देशभक्तों ने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। उनके त्याग, साहस और समर्पण से प्रेरणा लेकर वर्तमान पीढ़ी को देश के विकास, सुरक्षा और गौरव के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
अपने संबोधन के अंत में डॉ. सेठी ने आह्वान किया कि प्रत्येक नागरिक राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करे, समाज में एकता बनाए रखे तथा देश की उन्नति के लिए निरंतर प्रयासरत रहे। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता केवल देश के लिए कुछ करने का विचार रखने की नहीं, बल्कि देश के लिए जीने का संकल्प लेने की भी है। राष्ट्र चेतना, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की भावना से ही भारत परम वैभव के लक्ष्य की ओर अग्रसर होगा।
पथ संचलन के समापन के पश्चात स्वयंसेवकों द्वारा शरद पूर्णिमा उत्सव के उपलक्ष्य में खीर के प्रसाद का वितरण किया गया।

