

नर्मदापुरम / आजकल भ्रष्टाचार को लेकर नए-नए पेतरे अपना रहे हैं। इन्हें देखने वाला कोई भी नहीं है। लोक निर्माण विभाग में कमीशनखोरी और तकनीकी मनमानी का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिले के प्रभारी मंत्री राकेश सिंह के प्रभार वाले विभाग में जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ताजा मामला निमसाड़िया से पांजरा तक बन रही 3.20 किलोमीटर लंबी सड़क के सुदृढ़ीकरण कार्य का है, जहां करीब 1.51 करोड़ रुपये की लागत वाली सड़क की अनिवार्य निचली परते डाले बिना ही सीधे ऊपरी कांक्रीट की परत बिछाई जा रही है। कागजों पर पूरी ‘नींव’, धरातल पर सिर्फ मलवा टेंडर (एन आई टी) के तकनीकी शेड्यूल के मुताबिक, कांकरीट बिछाने से पहले सड़क का मजबूत आधार तैयार करना अनिवार्य था। इसमें लाखों रुपये की परते शामिल थी। कल्ड स्टोन एग्रीगेट 273 घन मीटर लागत 3.27 लाख वेट मिक्स मैकडम 1425 घन मीटर सेंसर पेवर द्वारा लागत 20.67 लाख प्राइमर एवं टैक कोट बिटुमेन की पकड़ बनाने वाली परतें लागत 4.30 लाख से अधिक। नियमों के अनुसार इन चार परतों के पूरी तरह तैयार और कॉम्पैक्ट होने के बाद ही डेंस विदुमिनस और हुई लीन कांक्रीट (डीएलसी) का काम शुरू हो सकता था। मगर जमीनी हकीकत इसके उलट है। मौके पर न तो दबा हुआ, सब बेस नजर आ रहा है और न ही प्राइमर का टैंक नोट के कोई निशान है। सिर्फ चोली बाजरी, मिट्टी और पत्थरों के ऊपर सीधे कांक्रीट मिक्सर से सूखा माल डालकर औपचारिकता पूरी की जा रही है।
अधिकारियों के हस्ताक्षर पर उठे सवाल……
इस पूरी निविदा और कार्ययोजना पर सब-इंजीनियर, सहायक यंत्री (एसडीओ) और कार्यपालन यंत्री (ईई) के हस्ताक्षर मौजूद है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब नींव की परतों का अस्तित्व ही नहीं है, तो कांक्रीट की अनुमति किसने दी? क्या विभाग की माप पुस्तिका में इन नदारद मदों की फर्जी एंट्री कर भुगतान निकालने का रास्ता तैयार किया जा रहा है?
पहली बारिश भी नहीं झेल पाएगी सड़क……
सड़क निर्माण विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यदि सब-बेस और बेस चोर्स मजबूत न हो, तो कंक्रीट की सड़क भारी वाहनों का दबाव नहीं झेल सकती। तकनीकी मानको की यह अनदेखी सड़क की उम्र को खत्म कर देगी और आगामी मानसून की पहली तेज बारिश में ही यह उखड़कर गड्डों में तब्दील हो जायगी । यह सीधे तौर पर जनता के टैक्स के 1.51 करोड़ रुपयों को पानी में बहाने जैसा है। कोर कटिंग और स्वतंत्र जांच की मांग K इस फर्जीवाड़े को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों में गहरा आक्रोश है। लोगों ने मामले की लीपापोती रोकने के लिए सड़क के विभिन्न हिस्सों से कोर कटिंग कराने, परतों की मोटाई नापने और एमची की फॉरेंसिक जांच की मांग उठाई है। जब इस गंभीर अनियमितता पर पीडब्ल्यूडी के जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन उठाना तक मुनासिब नहीं समझ्छ। अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी है कि क्या इस खुले भ्रष्टाचार पर ठेकेदार और इंजीनियरों पर कार्रवाई होगी, या फिर यह फाइल भी दबा दी जाएगी।
इनका कहना है…..
मैं लगातार तीन बार रोड का निरीक्षण और गुणवत्ता की पूरी कर रहा हूं। रही रोड की बात तो रोड बनना चालू हुई है रोड अच्छी बनेगी। कोई जगह अमर से भी काम होगा और पूरी निर्माण जो से रहा है रोड का यह गुणवत्ता पूर्ण हो रहा है।
एसडीओ लोक निर्माण विभाग।
नर्मदापुरम रोड का काम ठीक से हो रहा है। सभी लेयर पर काम हो रहा है। कछ नहीं छोड़ा जा रहा है। हर रोड की एक डिजाइन अलग होती है। उस हिसाब से काम चल रहा है। हम इसका निरीक्षण करने जल्द ही पहुंचेंगे और रोड का निरीक्षण किया जाएगा।
प्रीति पटेल, कार्यपालन यंत्री PWD, नर्मदापुरम।

