
नर्मदापुरम / सिवनी मालवा क्षेत्र में खेतों में फसल कटने के बाद बचे अवशेष किसानों के सामने अक्सर एक बड़ी चुनौती बन जाते हैं। इन्हें खेत से हटाने में मेहनत और समय लगता है, वहीं अगली फसल की तैयारी भी प्रभावित होती है। कई बार किसान इन अवशेषों को जलाने का रास्ता अपनाते हैं, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। लेकिन अब इन अवशेषों को समस्या के बजाय उपयोगी संसाधन बनाने की दिशा में पहल की जा रही है। दतवासा के मोहित गौर एवं मधुर गौर आधुनिक बेलिंग मशीनों की मदद से कृषि अवशेषों को गठ्ठरों में बदलने का काम कर रहे हैं। चौतलाय के आसपास चल रही यह गतिविधि फसल अवशेषों के बेहतर प्रबंधन की नई संभावनाएं सामने ला रही है।
खेतों में बिखरे अवशेष, अब मशीनों से बनेंगे गठ्ठर…..
मक्का, धान, गेहूं और गन्ने की कटाई के बाद खेतों में बचने वाले अवशेषों को एकत्रित करना आसान नहीं होता। ऐसे में बेलिंग सिस्टम उपयोगी साबित हो सकता है। आधुनिक मशीनों की मदद से बिखरे हुए अवशेषों को समेटकर दबाया जाता है और उनके गठ्ठर तैयार किए जाते हैं। इससे अवशेषों को एक जगह एकत्रित करना, उनका भंडारण करना और दूसरे स्थानों तक पहुंचाना आसान हो जाता है।
मोहित गौर और मधुर गौर इसी तकनीक के माध्यम से कृषि अवशेषों को उपयोग के योग्य बनाने में जुटे हैं। इस प्रक्रिया से खेतों में बचे अवशेषों को हटाने में सुविधा मिलने और अगली बुवाई के लिए जमीन तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पराली जलाने के बजाय उपयोग पर जोर……
फसल अवशेषों को जलाने से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण बढ़ाता है। इसके अलावा, आग का असर मिट्टी में मौजूद जैविक पदार्थों और उपयोगी जीवों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में अवशेषों को एकत्रित कर उनका वैकल्पिक उपयोग करना बेहतर विकल्प बन सकता है।
बेलिंग सिस्टम के जरिए तैयार किए गए गठ्ठरों को बड़ी औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचाने की योजना है। वहां इनका उपयोग उपयुक्त तकनीकी व्यवस्था के तहत बॉयलर में ईंधन के रूप में किया जा सकेगा। इस तरह खेती से निकलने वाले अवशेष उद्योगों के लिए उपयोगी सामग्री बन सकते हैं और उन्हें खुले में जलाने की जरूरत कम करने में मदद मिल सकती है।
किसानों की परेशानी से औद्योगिक जरूरत तक का रास्ता……
इस पहल की खासियत यह है कि इसमें कृषि क्षेत्र की एक समस्या को औद्योगिक उपयोग से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। खेतों में अनुपयोगी समझे जाने वाले अवशेषों को व्यवस्थित रूप से एकत्रित कर उद्योगों तक पहुंचाना उनके बेहतर प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
हालांकि, इस व्यवस्था को लंबे समय तक सफल बनाए रखने के लिए किसानों को उचित लागत पर सेवा मिलना, गठ्ठरों का परिवहन, सुरक्षित भंडारण और औद्योगिक इकाइयों तक नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना जरूरी होगा। इन पहलुओं पर बेहतर समन्वय होने से ऐसी गतिविधियों का दायरा बढ़ सकता है।
आधुनिक तकनीक से कृषि अवशेष प्रबंधन की नई राह……
सरकार भी कृषि यंत्रीकरण और फसल अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को सहायता एवं ऋण की सुविधाएं उपलब्ध कराती है। ऐसी तकनीकों को प्रोत्साहन मिलने से कृषि अवशेषों के उचित उपयोग और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को गति मिल सकती है।
दतवासा के मोहित गौर एवं मधुर गौर द्वारा चौतलाय के आसपास आधुनिक मशीनरी से किया जा रहा यह कार्य कृषि अवशेषों के वैकल्पिक उपयोग की दिशा में सराहनीय पहल है। यदि इस तरह के प्रयासों को किसानों की जरूरतों और उद्योगों की मांग से प्रभावी ढंग से जोड़ा जाए, तो पराली प्रबंधन की समस्या कम करने के साथ कृषि अवशेषों के उपयोग की नई संभावनाएं भी विकसित हो सकती हैं।

