

नर्मदापुरम / महिला एवं बाल विकास में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर चलने वाले पांच दिवसीय कार्यक्रम अंतर्गत आज दिनांक 14.10.2026 को नर्मदापुरम जिले के तहसील सिवनी मालवा के ग्राम लोखरतलाई के ग्राम पंचायत में बालिकाओं को भ्रमण कराया गया एवं ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली से अवगत कराया गया एवं एनीमिया मुक्त और हीमोग्लोबिन बढ़ाने और स्वस्थ रहने संबंधी जानकारी दी गई।गतिविधियों अंतर्गत महिला एवं बाल विकास विभाग सेक्टर पर्यवेक्षक श्रीमती सोनिया सैनी द्वारा बालिकाओं को बताया गया कि बाल विवाह क्या है एवं इसमें किस प्रकार की सजा का प्रावधान है। संपूर्ण जानकारी देते हुए बच्चों को बताया कि बाल विवाह एक कानूनी अपराध है, ऐसा विवाह जहां लड़की की उम्र 18 से कम और लड़की की उम्र 21 साल से कम में किया जाता है, बाल विवाह कहलाता है। बाल विवाह निषेध हेतु अधिनियम 2006 में लागू हुआ। बाल विवाह रोकथाम के लिए जागरुकता अभियान चलाए जा रहे हैं। किसी भी प्रकार की कानूनी सहायता हेतु 1098, 112 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें। लड़कियों की शिक्षा सामाजिक सोच में बदलाव और बाल विवाह निषेध अधिकारियों की सक्रिय भूमिका दोनों से ही यह संभव है बाल विवाह करवाना मानवीय अधिकारों का उलांघन है। किसी बालक अथवा बालिका का बाल विवाह हो जाने पर बालक या बालिका द्वारा इसकी शिकायत पर बाल विवाह शून्य घोषित किया जा सकता है। यह असंज्ञेय और गैरजमानती दंडनीय अपराध है। बाल विवाह के नुकसान हमे कई प्रकार से होते हैं। स्वास्थ्य जोखिम नुकसानों अंतर्गत कम उम्र में गर्भावस्था से मां और बच्चे दोनों को खतरा होता है। बालिकाएं शिक्षा से वंचित हो जाती हैं कुछ लड़कियां स्कूल छोड़ देती हैं। जिससे उनका भविष्य अंधकार में हो जाता है घरेलू हिंसा का शिकार होती है। दुर्व्यवहार एवं शोषण के शिकार होने की संभावना भी हो जाती है। सामाजिक और आर्थिक रूप से भी बाल विवाह अभिशाप है। बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 यह बाल विवाह को रोकता हैबाल विवाह शामिल लोगों को सजा का प्रावधान करता है। इस अंतर्गत बाल विवाह में शामिल होने वाले सभी व्यक्तियों पंडित हलवाई रसोईया एवं शामिल होने वाले सभी व्यक्तियों को 2 साल की कैद या एक लाख रुपए जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान किया जा सकता है। बाल विवाह निषेध अधिकारियों की संख्या वर्तमान में बढ़ा दी गई है। इसमें ग्राम सचिव राजस्व पटवारी को भी बालविवाह की सूचना दी जा सकती है। इसके लिए आवश्यक है कि समुदायों में बाल विवाह के प्रति अधिक से अधिक जागरूकता एवं दुष्परिणाम के बारे में शिक्षित किया जाए। लड़की, लड़कों को उनके अधिकारों एवं शिक्षा का महत्व समझाया जाए उन्हें सशक्त बनाया जाए। उनकी शिक्षा सुनिश्चित की जाए आत्मनिर्भर बनाया जाए ताकि वह अपने फैसले खुद ले सके एवं सामुदायिक भागीदारी में उन्हें अधिक से अधिक शामिल किया जाए। समाज के सभी लोगों को मिलकर बाल विवाह रोकना होगा। क्योंकि यह एक बुराई है जिससे बच्चों को बचपन छीन जाता है। इसे रोकने के लिए कानून जागरूकता और सामुदायिक प्रयासों की आवश्यकता है, ताकि हर बच्चा सुरक्षित रहे। कार्यक्रम में मुख्य रूप सरपंच शिखा गुप्ता, राकेश कीर, वार्ड मेंबर श्रीमती द्रोपती, चंद्रशेखर नागोरिया, ग्राम पंचायत सचिव लोखरतलाई, महिला एवं बाल विकास विभाग पर्यवेक्षक श्रीमती सोनिया सैनी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, ज्योति कहार, रामा मालवीय, सहायिका मालती आठनेर, लीला जोशी एवं किशोरी बालिकाएं ग्राम की महिलाएं छात्र-छात्राएं शामिल हुए।

