नर्मदापुरम / शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होंगे। शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म का एक बेहद पवित्र और प्रमुख त्योहार है, जो आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (पहले दिन) से नवमी तक नौ दिनों तक बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों (नवदुर्गा) की आराधना के लिए समर्पित है और आमतौर पर सितंबर या अक्टूबर के महीने में आता है।
मुख्य विशेषताएं और महत्व
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• बुराई पर अच्छाई की जीत: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नौ दिनों में माता दुर्गा ने महिषासुर नाम के राक्षस का वध कर देवताओं और पृथ्वी वासियों को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया था। इसलिए इसे शक्ति की उपासना का पर्व माना जाता है।
• कलश स्थापना: नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में घरों और पूजा पंडालों में कलश (घट) स्थापना की जाती है और अखंड ज्योति जलाई जाती है।
• व्रत और साधना: इन नौ दिनों में भक्त उपवास (व्रत) रखते हैं, दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और सात्विक जीवन जीते हैं।
• कन्या पूजन: अष्टमी या नवमी के दिन छोटी बच्चियों को माता का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है, उन्हें भोजन कराया जाता है और उपहार दिए जाते हैं।
• दशहरा (विजयादशमी): नवरात्रि के ठीक अगले यानी दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है, जो भगवान राम द्वारा रावण के वध और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है।
• सांस्कृतिक उत्सव: इस दौरान पूरे भारत में, विशेषकर गुजरात में गरबा और डांडिया, और पश्चिम बंगाल में भव्य दुर्गा पूजा पंडालों का आयोजन किया जाता है। (संकलन – प्रीति चौहान)

