

नर्मदापुरम / पितृ मोक्ष अमावस्या पर हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई माँ नर्मदा में आस्था की डुबकी। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड एवं शहर के मार्गो पर रही भीड़। सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या (जिसे सर्वपितृ अमावस्या या पितृ विसर्जन अमावस्या भी कहते हैं) पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है।
मुख्य बातें….
तारीख और समापन….
यह आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है, जिससे 16 दिनों के पितृ पक्ष का समापन होता है।
किसे समर्पित…..
यह दिन उन सभी पूर्वजों (पितरों) के लिए होता है जिनकी मृत्यु की तिथि याद नहीं होती या जिनका श्राद्ध पूरे पक्ष के दौरान किसी कारणवश छूट जाता है।
प्रमुख कर्मकांड……
इस दिन घर के जाने-अनजाने सभी पितरों के निमित्त श्रद्धापूर्वक तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोज कराया जाता है।
विदाई…..
ऐसी मान्यता है कि इन दिनों पृथ्वी पर आए पितर अमावस्या तिथि समाप्त होने के बाद वापस अपने लोक को लौटते हैं, इसलिए उन्हें आदरपूर्वक विदा किया जाता है।
विशेष उपाय…….
शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे दीपक (दीपदान) जलाया जाता है तथा घर की दहलीज पर भी दीपक जलाकर पितरों से सुख-शांति का आशीर्वाद मांगा जाता है।

