
नर्मदापुरम / भारत की सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक एकता और राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के संकल्प के साथ 100 वर्ष पूर्व प्रारंभ हुई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यात्रा वर्ष 2026 में अपने 101वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। व्यक्ति निर्माण से समाज परिवर्तन, समाज को वैचारिक दिशा देने और संगठित समाज के माध्यम से सशक्त एवं अक्षुण्ण राष्ट्र के निर्माण की भावना संघ की कार्यपद्धति का प्रमुख आधार रही है।
नर्मदापुरम विभाग प्रचार प्रमुख संतोष नौरिया ने जानकारी में बताया कि संघ रचनानुसार मध्यभारत प्रान्त के नर्मदापुरम विभाग के अंतर्गत 5 जिले- हरदा, नर्मदापुरम, पिपरिया, बैतूल और मुलताई जिलों कि 33 इकाइयों 7 नगर और 26 खंडों कि सभी 86 बस्तियों और 300 मण्डलों के पथ संचलन तय हो चुके हैं।
इसी क्रम में इस वर्ष विजयादशमी उत्सव के अवसर पर नर्मदापुरम नगर में भी बस्तीश: पथ संचलन के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए नगर की 12 बस्तियों की तिथिवार योजना निर्धारित की गई है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में विजयादशमी के दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। उस समय देश अंग्रेजी शासन के अधीन था और समाज के सामने राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक संगठन तथा सांस्कृतिक स्वाभिमान को सुदृढ़ करने की बड़ी चुनौती थी। ऐसे परिवेश में व्यक्ति निर्माण को राष्ट्र निर्माण का आधार मानते हुए संघ की स्थापना हुई। कालांतर में संघ ने शाखा, अनुशासन, सेवा, संगठन और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी गतिविधियों का विस्तार किया।
संघ की विचारधारा का मूल उद्देश्य समाज में राष्ट्रीय भावना का जागरण, सांस्कृतिक विरासत के प्रति गौरवबोध तथा सामाजिक एकजुटता को मजबूत करना रहा है। संघ के स्वयंसेवक नियमित शाखाओं और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से अनुशासन, शारीरिक दक्षता, सामूहिकता और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध का अभ्यास करते हैं। विजयादशमी का पर्व संघ के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसी दिन संगठन की स्थापना हुई थी। इस अवसर पर देशभर में शस्त्र पूजन, उत्सव, बौद्धिक कार्यक्रम और पथ संचलन आयोजित किए जाते हैं।
नर्मदापुरम में बस्तीवार पथ संचलन की रूपरेखा तैयार….
विजयादशमी उत्सव के क्रम में नर्मदापुरम नगर में इस वर्ष 12 बस्तियों से पथ संचलन निकालने की योजना बनाई गई है। इसके लिए बस्तीवार तिथियां निर्धारित की गई हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 11 अक्टूबर से संचलन का क्रम प्रारंभ होकर 23 अक्टूबर तक चलेगा। अलग-अलग तिथियों पर स्वयंसेवक निर्धारित बस्तियों में एकत्रित होकर पथ संचलन में सहभागिता करेंगे।
पथ संचलन संघ की परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, गणवेशधारी स्वयंसेवक अनुशासित पंक्तियों में घोष के साथ कदमताल करते हुए नगर के निर्धारित मार्गों से गुजरते हैं। इस दौरान सामूहिक अनुशासन, संगठनात्मक एकता और राष्ट्र के प्रति समर्पण का संदेश दिया जाता है। बस्तीवार संचलन का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर स्वयंसेवकों की सहभागिता बढ़ाना तथा शाखा और संगठनात्मक गतिविधियों को समाज के बीच अधिक प्रभावी बनाना है।
इन तिथियों पर होंगे बस्तीवार पथ संचलन….
माँ शक्ति कि आराधना के साथ- साथ नर्मदापुरम नगर कि बस्तीश: संचलन की तिथियां इस प्रकार हैं—
11 अक्टूबर, रविवार — उद्यमसिंह बस्ती,
14 अक्टूबर, बुधवार — केशव बस्ती,
15 अक्टूबर, गुरुवार — माधव एवं मधुकर बस्ती, संयुक्त,
16 अक्टूबर, शुक्रवार — भगतसिंह बस्ती,
18 अक्टूबर, रविवार — शिवाजी, गुरुनानक एवं रामदास बस्ती, संयुक्त,
20 अक्टूबर, मंगलवार — दुर्गावती बस्ती, चाफेकर बस्ती, पृथक,
22 अक्टूबर, गुरुवार — परशुराम बस्ती,
23 अक्टूबर,शुक्रवार — अहिल्या बस्ती,
बस्ती प्रमुखों से अभ्यास प्रारंभ करने का आह्वान….
जारी सूचना में सभी बस्ती प्रमुखों से अपनी-अपनी बस्ती में पथ संचलन की तैयारी एवं अभ्यास प्रारंभ करने का आह्वान किया गया है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बस्तियों के संचलन पूर्ण होने के बाद नगर के पथ संचलन की योजना भी बनाई गई है। इससे पहले स्वयंसेवकों को कदमताल, अनुशासन और सामूहिक संचलन का अभ्यास कराया जाएगा।
विजयादशमी उत्सव के माध्यम से संघ अपने स्थापना दिवस की परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ समाज में संगठन, सेवा और राष्ट्रीय चेतना का संदेश देने का प्रयास करता है। नर्मदापुरम में प्रस्तावित बस्तीश: पथ संचलन इसी आयोजन का हिस्सा होंगे। आने वाले दिनों में निर्धारित तिथियों के अनुसार नगर की विभिन्न बस्तियों में संचलन की गतिविधियां दिखाई देंगी।

