
नर्मदापुरम / लीला में दिखाया कि मुनि विश्वामित्र का जनकपुर आगमन विशेष कार्य हेतु होता है, जनकपुर पहुचकर प्रातः काल उठकर श्रीराम जी और लक्ष्मणजी ने गुरु विश्वामित्र से आज्ञा लेकर नगर दर्शन और पुष्पवाटिका देखने जाते हैं, जहां जनकपुर वहां के बालकों के साथ बाजार का भृमण करने के उपरांत जब श्रीराम लक्ष्मण पुष्पवाटिका में फूल चुन रहे होते हैं। उसी समय जनकसुता जानकीजी वहां सखियों सहित गिरिजा पूजन के लिए आती हैं, तब प्रभु श्रीराम जी ने लताओं की ओट से जानकीजी के दर्शन करते हैं। जानकीजी गिरिजा पूजन विधि विधान से करती हैं और वे भी प्रभु श्रीराम के दर्शन करके लौट जाती हैं। गुरुवार को हुई लीला में पात्र निर्देशन पं सुनील चौरे, संगीत निर्देशन पं. राम परसाई तथा संगत आनंद नामदेव, आदित्य परसाई, अथर्व दुबे की रही। पार्श्व गायन श्रीमती चित्रा हर्णे का रहा, प्रतिदिन की लीलाओं में दृश्य संयोजन अक्षय मिश्रा, प्रतीक दुबे का होता है। लीला में पात्रों का सुंदर श्रंगार, हेमंत मालवीय, माधव दुबे, अभिषेक पटवा, मदुरम चंदेल और अमित यादव द्वारा किया जाता है । दिनांक 9 अक्टूबर को धनुषयज्ञ की लीला का आकर्षक मंचन होगा ।

