
नर्मदापुरम / मुनि विश्वामित्र के साथ वन में पहुंचे श्रीराम और लक्ष्मण ने ताड़का का वध किया मारीच को बाण से सौ योजन दूर फेंका । अग्निबाण से सुबाहु को भस्म किया, श्री राम जी के द्वारा ही अहिल्या का उद्धार हुआ ।
आज की लीला में दिखाया गया कि मुनि विश्वामित्र वन में राक्षसों के आतंक की चिंता लिए राजा दशरथ के पास पहुंचते हैं, राजा दशरथ उनका स्वागत करके चारों पुत्रों से मुनि के चरण स्पर्श करने को कहते हैं, राजा दशरथ मुनि विश्वामित्र के आगमन का कारण पूछते हैं तो मुनि विश्वामित्र कहते हैं कि राजन असुर समूह मुझे बहुत सताते हैं, राक्षसों से रक्षा करने के लिए उन्हें अनुज लक्ष्मण सहित श्री रघुनाथ जी चाहिए जिससे वह राक्षसों का संहार करा सके और ऋषि मुनि की जाती सुरक्षित हो जाए, विश्वामित्र की बातों को सुनकर राजा दशरथ व्याकुल हो जाते हैं और अनुरोध करते हैं कि श्री राम, उनको बहुत अधिक प्रिय हैं मैं कैसे दे दूं यह किशोर बालक राक्षसों को कैसे वध करेंगे तब राजगुरु वशिष्ठ राजा दशरथ को समझते हैं और उनके मन का संशय दूर करते हैं तब राजा दशरथ आशीर्वाद देकर श्री राम, लक्ष्मण को मुनि विश्वामित्र को सौंप देते हैं। मुनि विश्वामित्र के साथ श्री राम लक्ष्मण वन की ओर प्रस्थान करते हैं, वन में जाते हुए ताड़का नाम की राक्षसी को एक ही बाण से मारकर उसका वध कर देते हैं, फिर मारीच को अपने बाण से सौ योजन दूर फेंक कर अग्निबाण से सुबाहु को भस्म करते हैं, तत्पश्चात् भगवान राम ने अहिल्या का उद्धार की जीवंत झांकी को प्रस्तुति की ।
आज की लीला में यश शुक्ला ने राम, शिवाय शुक्ला ने लक्ष्मण, विनोद परसाई ने विश्वामित्र, सुभाष परसाइ ने दशरथ, दीपेश व्यास ने मारीच पुनीत पाठक ने जनक दूत, दीपेश व्यास ने मारीच और शिवांशु मिश्रा ने ताड़का, दीपक साहू ने सुबाहु की, अनुकल्प शर्मा ने सेनानायक की भूमिका निभाई । दिनांक 8 अक्टूबर को नगर दर्शन, पुष्वाटिका की लीला का मंचन होगा ।

