

नर्मदापुरम / सर्किट हाउस (परमहंस) घाट पर पितरों की आत्मा की शांति के लिए आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन आज श्रद्धा और भक्ति का माहौल चरम पर रहा। कथा के चतुर्थ दिवस पर पूज्य कथावाचक पंडित राजेंद्र पुरोहित ने भगवान के वामन अवतार, राजा बलि प्रसंग, प्रह्लाद चरित्र और कंस के अत्याचारों के साथ-साथ भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य जन्म और नंदोत्सव का अत्यंत मार्मिक व जीवंत वर्णन किया।
जैसे ही कथा पंडाल में भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ, पूरा परिसर ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ और ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
देव ऋषि मनुष्य पितृ तर्पण समिति के सभी सदस्यों ने नवजात बालकृष्ण रूप की आरती उतारी।
इस पावन अवसर पर पंडाल में मौजूद सैकड़ों श्रद्धालु भक्ति भाव में डूबकर झूमने और नाचने लगे। समिति की ओर से नंदोत्सव के उपलक्ष्य में खिलौने, टाफियों फल, मिठाइयां और माखन-मिश्री का प्रसाद वितरित किया गया।
अधर्म के नाश के लिए होता है भगवान का अवतार…..
कथाव्यास आचार्य पंडित राजेंद्र पुरोहित ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि जब-जब धरती पर अधर्म, अत्याचार और पाप बढ़ता है, तब-तब भगवान भक्तों की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं। कंस के कारागार में देवकी और वासुदेव के यहाँ भगवान का प्राकट्य और फिर आधी रात को गोकुल पहुंचना, यह दर्शाता है कि भगवान विपरीत परिस्थितियों में भी अपने भक्तों की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। उन्होंने कहा कि भागवत कथा केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि इसके आदर्शों को जीवन में उतारने के लिए है।
कल की कथा की जानकारी…
कथा समिति के सेवादारों ने बताया कि भागवत कथा के पांचवें दिन अगले दिन 06 अक्टूबर को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, माखन चोरी प्रसंग, पूतना वध और छप्पन भोग के साथ भव्य गोवर्धन पूजा का प्रसंग सुनाया जाएगा। इस अवसर पर मुख्य रूप से विशिष्ट अतिथियों, समिति के प्रमुख पदाधिकारियों के सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

