
नर्मदापुरम / सिवनी मालवा /ग्राम बराखड़ कलां (तहसील सिवनी मालवा, जिला नर्मदापुरम) स्थित दो प्रमुख सार्वजनिक ट्रस्टों—श्री महावीर जी मंदिर दृष्टियायत (ट्रस्ट क्र. 121/55) एवं राम जानकी राधा कृष्ण मंदिर (ट्रस्ट क्र. 232/55) तथा नाले पर बनाई गई 22 दुकानों के निर्माण व आवंटन में हुए कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं का मामला गरमाता जा रहा है। शिकायतकर्ता द्वारा लगातार प्रशासनिक दरवाजे खटखटाने के बावजूद जांच रिपोर्ट सार्वजनिक न किए जाने से अब प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में आ गई है।
कलेक्टर ने गठित किया था 4 सदस्यीय जांच दल….
शिकायतकर्ता नीरज तिवारी (निवासी ग्राम बराखड़ खुर्द) ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि उन्होंने दिनांक 21 अप्रैल 2026 को नर्मदापुरम कलेक्टर को तीन अलग-अलग विस्तृत फाइलों में वित्तीय गड़बड़ी और निर्माण संबंधी अनियमितताओं के पुख्ता प्रमाण सौंपते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर द्वारा 28 अप्रैल 2026 को चार सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी।
इस समिति में: अपर कलेक्टर नीता कोरी, तहसीलदार नितिन तोड
नायब तहसीलदार कीर्ति प्रधान, नायब नाजिर, बिशन सिंह रघुवंशी को शामिल किया गया था।
22 दुकानों के निर्माण व आवंटन में बंदरबांट का आरोप….
संभागीय कमिश्नर और जिला प्रशासन को दिए गए ज्ञापनों में गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि सिवनी मालवा मुख्य मार्ग पर नाले के ऊपर 22 दुकानों का निर्माण कार्य पूरा करा लिया गया है। इन दुकानों की खुली एवं सार्वजनिक नीलामी कराने के बजाय कागजों में या अधिकारियों की कथित मिलीभगत से गुपचुप तरीके से राशि लेकर चहेतों को आवंटित कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने मांग की थी कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता रखने हेतु दुकानों का आवंटन सार्वजनिक मुनादी और वीडियोग्राफी के साथ खुली बोली लगाकर किया जाना चाहिए।
जांच रिपोर्ट पर पर्दा, ट्रस्टियों का ‘क्लीन चिट’ का दावा हैरानी की बात यह रही कि एक तरफ जब शिकायतकर्ता जांच की स्थिति जानने के लिए अधिकारियों के चक्कर काटते रहे, तो उन्हें हर बार यही कहा गया कि जांच प्रक्रियाधीन है।
वहीं दूसरी तरफ, दिनांक 22 अगस्त 2026 को संबंधित ट्रस्टियों ने अचानक एक प्रेस नोट जारी कर और प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर दावा कर दिया कि प्रशासन से उन्हें ‘क्लीन चिट’ मिल चुकी है।शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि जिस जांच रिपोर्ट को प्रशासन आज तक गोपनीय बनाए हुए है।
कथित क्लीन चिट की जानकारी और आधार ट्रस्टियों तक आखिर कैसे पहुंचा…..
जनसुनवाई, कमिश्नर और RTI में भी नहीं मिली रिपोर्ट सच्चाई सामने लाने के लिए आवेदक नीरज तिवारी द्वारा लगातार विधिक प्रयास किए गए11 अगस्त 2026: कलेक्टर जनसुनवाई में विधिवत आवेदन दिया गया और उसी दिन सूचना के अधिकार (RTI) के तहत रिपोर्ट की मांग की गई।08 सितंबर 2026: संभागीय कमिश्नर को लिखित शिकायत दी गई और पुनः आरटीआई आवेदन प्रस्तुत किया गया। 30 सितंबर 2026: संयुक्त कलेक्टर नितिन टाले का एक पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें कहा गया कि “यदि आपको जांच रिपोर्ट चाहिए तो RTI लगाएं, तभी विधिवत रिपोर्ट मिल पाएगी”।
शिकायतकर्ता का कहना है कि जब 8 सितंबर 2026 को ही आरटीआई आवेदन मय आवश्यक दस्तावेज और प्रमाणित प्रतिलिपि हेतु लगाया जा चुका है, तो इस तरह की औपचारिकताएं बताकर टालमटोल क्यों किया जा रहा है? एक तरफ आम नागरिक नियमों से गुजरने और अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद भी रिपोर्ट पाने से वंचित है, वहीं दूसरी तरफ ट्रस्टियों को बिना किसी आवेदन या आरटीआई के ही पूरी जानकारी मिल जाती है।
लोकायुक्त और EOW में होगी औपचारिक शिकायत….
शिकायतकर्ता नीरज तिवारी ने स्पष्ट किया कि यदि जांच पूर्ण हो चुकी है तो नियमानुसार शिकायतकर्ता को तत्काल रिपोर्ट उपलब्ध कराई जानी चाहिए। यदि जांच अभी भी अधूरी है, तो ‘क्लीन चिट’ का झूठा दावा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। प्रशासन के इस टालमटोल रवैये और रिपोर्ट दबाए जाने के विरोध में अब वे ट्रस्टियों सहित जांच में संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ लोकायुक्त संगठन और राज्य आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) में विधिवत शिकायत दर्ज कराएंगे।

