

नर्मदापुरम / स्प्रिंगडेल्स सीनियर सेकेंण्डरी स्कूल नर्मदापुरम के लिए गौरव का एक और अध्याय जुड़ गया है। विद्यालय की संस्कृत शिक्षिका सुश्री बाली कड़वे के आलेख को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की प्रतिष्ठित द्विवार्षिक ई-पत्रिका सेनबोसेक के जुलाई–दिसंबर 2025 संस्करण के “अगले कदम” सेक्शन में स्थान मिला है। राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक मंच पर विद्यालय की शिक्षिका की रचनात्मक अभिव्यक्ति को स्थान मिलने पर विद्यालय परिवार द्वारा अभिनंदन समारोह आयोजित कर उनका अभिनंदन किया गया।
सीबीएसई के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय शैक्षणिक मंच पर किसी शिक्षक एवं विद्यालय के रचनात्मक कार्यों का प्रकाशित होना सुश्री बाली की विषयगत समझ, सृजनात्मक दृष्टिकोण एवं शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर योगदान का परिचायक है। सुश्री बाली कड़वे की इस उपलब्धि से विद्यालय परिवार में हर्ष का वातावरण रहा।
प्राचार्य श्रीमती मोना चटर्जी ने सुश्री बाली कड़वे को बधाई देते हुए कहा, “एक शिक्षक की पहचान केवल कक्षा में दिए गए ज्ञान तक सीमित नहीं होती। जब शिक्षक अपने अनुभव, चिंतन और रचनात्मक विचारों को व्यापक शैक्षणिक मंच तक पहुंचाते हैं, तो वे शिक्षा जगत को समृद्ध करने के साथ विद्यार्थियों के सामने सीखने और सृजन का प्रेरक उदाहरण भी प्रस्तुत करते हैं। बाली कड़वे की यह उपलब्धि पूरे विद्यालय परिवार के लिए गर्व का विषय है और हमारे शिक्षकों को निरंतर उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रेरित करती है।”
डायरेक्टर डॉ. आशीष चटर्जी ने सुश्री बाली कड़वे को शुभकामनाएं देते हुए कहा, “शिक्षा की वास्तविक शक्ति केवल ज्ञान के संप्रेषण में नहीं, बल्कि नए विचारों को जन्म देने और उन्हें समाज तक पहुंचाने में भी है। सीबीएसई के राष्ट्रीय मंच पर बाली कड़वे के आलेख का प्रकाशित होना उनकी रचनात्मकता का प्रमाण है साथ ही सीबीएसई के अधिकारियों द्वारा लगातार उनको दिया गया मार्गदर्शन एवं विद्यालय के नवाचारों के प्रति उनकी उत्सुकता हमारी सामूहिक उपलब्धि के साथ हमारी शैक्षणिक संस्कृति का भी प्रतिबिंब भी है, जहां शिक्षकों को सोचने, सृजन करने और अपनी प्रतिभा को व्यापक मंच देने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
अभिनंदन समारोह में विद्यालय परिवार की ओर से सुश्री बाली कड़वे को सम्मानित करते हुए उनको बधाई दी है। उनकी इस उपलब्धि ने स्प्रिंगडेल्स स्कूल की “Every Child Matters” की भावना के साथ-साथ शिक्षकों में निरंतर सीखने, चिंतन और सृजन की संस्कृति को भी नई पहचान प्रदान की।

