

नर्मदापुरम / सेवा संकल्प अभियान के तहत आज नर्मदा एजुकेशन सोसायटी कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन नर्मदापुरम में जल संरक्षण विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन महाविद्यालय मे किया गया।
गोष्ठी का शुभारंभ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. ज्योत्सना खरे ने अपने उद्बोधन में कहा कि जल ही जीवन है और जल के बिना भविष्य की कल्पना असंभव है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि हम विद्यार्थियों में जल संरक्षण के प्रति संस्कार विकसित करें। वर्षा जल संचयन, जल का पुनः उपयोग और जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। शिक्षा के माध्यम से ही समाज में जल के प्रति चेतना जागृत की जा सकती है।
मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. कमलेश शुक्ला ने जल संरक्षण पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नर्मदा अंचल में जल प्रचुर मात्रा में होने के बावजूद जल का दुरुपयोग एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने विद्यार्थियों को जल संरक्षण के पारंपरिक और आधुनिक उपायों जैसे – खेत तालाब, रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग, बोरवेल रिचार्ज और नर्मदा नदी के संरक्षण के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने आव्हान किया कि प्रत्येक विद्यार्थी जल दूत बनकर समाज को जागरूक करे।
इस अवसर पर महाविद्यालय के छात्र-अध्यापकों ने भी जल संरक्षण पर अपने विचार प्रस्तुत किए और जल बचाने की शपथ ली।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

