
नर्मदापुरम / कल 23 सितंबर को होने जा रही खगोलीय घटना सितंबर विषुव सितंबर इक्विनॉक्स को लेकर नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने सोशल मीडिया पर चल रहे एक बड़े भ्रम को दूर किया है। सारिका ने बताया कि इन दिनों इंटरनेट और सोशल मीडिया पर यह मैसेज तेजी से वायरल होता है कि इस दिन पूरी पृथ्वी पर दिन और रात पूरी तरह बराबर (12—12 घंटे के) होते हैं, जो कि वैज्ञानिक रूप से गलत है। 23 सितंबर को दिन और रात पूरी तरह बराबर नहीं होते हैं, बल्कि यह खगोलीय समानता इसके कुछ दिनों बाद देखने को मिलती है।
सारिका घारू ने अनुसार इस दिन की सबसे बड़ी और वास्तविक खगोलीय घटना यह है कि सूर्य बिल्कुल ठीक पूर्व से दिशा के बिंदु से उगेगा और ठीक पश्चिम दिशा में अस्त होगा साल के बाकी दिनों में सूर्य का उदय और अस्त होना उतर या दक्षिण की ओर झुका होता है, लेकिन 23 सितंबर को सूर्य की किरणें सीधे भूमध्य रेखा पर पड़ने के कारण यह सटीक दिशा में दिखाई देता है।

