
नर्मदापुरम / शासकीय गृहविज्ञान स्नातकोत्तर अग्रणी महाविद्यालय में दिनांक 22 सितंबर 26 को हिंदी साहित्य पर आधारित सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित हिंदी पखवाड़ा 2026 के अंतर्गत दिनांक 15 सितंबर 26 से 30 सितंबर 26 तक विभिन्न कार्यक्रम एवं प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर श्रुतलेख, कविता पाठ, वाद विवाद, भाषण, निबंध, सामान्य ज्ञान, कहानी पाठ, पुस्तक प्रदर्शनी एवं कार्यशाला का आयोजन किया जाना है। हिंदी के विकास में त्रिभाषा फार्मूला ही उपयुक्त है विषय पर वाद विवाद प्रतियोगिता,भारतीय ज्ञान परंपरा में हिंदी भाषा एवं साहित्य की भूमिका विषय पर भाषण प्रतियोगिता, राजभाषा हिंदी एवं राष्ट्रीय एकता विषय पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ संगीता अहिरवार ने प्रतिभागी छात्राओं को शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा है और हिंदी में बृहद साहित्य उपलब्ध है छात्राओं को अपनी रुचि अनुसार साहित्य को पढ़ने की आदत बनानी चाहिए ।
हिंदी विभाग की विभाग अध्यक्ष डॉ. पुष्पा दुबे ने छात्राओं का उद्बोधन करते हुए कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को देवनागरी लिपि में देश की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। डॉ. दुबे द्वारा त्रिभाषा सूत्र की विस्तृत जानकारी साझा की गई।
भारतीय ज्ञान परंपरा प्रभारी आर के चौकीकर ने अपने उद्बोधन में कहा कि हिंदी पखवाड़ा मनाने का मुख्य उद्देश्य कामकाज, पत्राचार आदि में राजभाषा के प्रति रुचि जगाना है।
डॉ. श्रुति गोखले ने कहा कि हिंदी पखवाड़ा मनाने का मुख्य उद्देश्य राजभाषा का प्रचार, सांस्कृतिक एकता एवं रचनात्मक विकास है।
इन प्रतियोगिताओं में डॉ. भारती दुबे, डॉ. पुष्पा दुबे, डॉ. श्रुति गोखले, डॉ. सी एस राज, डॉ. जी सी पांडे, डॉ. आर के चैकीकर ने निर्णायक रूप में अपनी गरिमामयी उपस्थिति प्रदान की।
श्रुत लेखन प्रतियोगिता में प्रथम वर्षा उमर, द्वितीय स्थान पर संगीता परसाई एवं तृतीय स्थान पर प्राची जाट रही। सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर सुजीता चैहान, द्वितीय स्थान पर सलोनी सेवरिया, तृतीय स्थान पर रजनी इवने रही एवं सांत्वना पुरस्कार के रूप में नर्मदी मांझी, संजना वारस्कर ने अपना स्थान अंकित किया।
इस अवसर पर कुमारी कु. काजल बाथरे, डॉ. कीर्ति दीक्षित, शैलेंद्र तिवारी, श्रीमती आभा वाधवा ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया।

