
नर्मदापुरम / “वराह जयंती” रविवार, 13 सितंबर को मनाई जा रही है। यह पावन पर्व *भगवान विष्णु के तीसरे अवतार भगवान वराह के प्राकट्य दिवस* के रूप में मनाया जाता है।
-: शुभ मुहूर्त और तिथि :-
• तृतीया तिथि आरंभ: 13 सितंबर 2026, सुबह 07:08 बजे।
• तृतीया तिथि समाप्त:* 14 सितंबर 2026, सुबह 07:06 बजे।
• पूजा का शुभ मुहूर्त:* दोपहर 01:23 बजे से दोपहर 03:51 बजे तक।
• अवधि: 02 घंटे 28 मिनट।
-: वराह जयंती का महत्व :-
• भगवान विष्णु ने पृथ्वी को बचाने के लिए वराह रूप में तीसरा अवतार लिया था।
• भगवान ने असुर हिरण्याक्ष का वध किया था।
• इस दिन पूजा करने से सुख, समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है।
-: पूजा विधि :-
• सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
• साफ वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लें।
• घर में कलश स्थापना करें।
• भगवान वराह की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
• भगवान को तुलसी, फूल, चंदन और भोग (नैवेद्य) चढ़ाएं।
• वराह अवतार की कथा सुनें और मंत्रों का जाप करें l
सनातन धर्म में भगवान विष्णु के कई अवतारों का वर्णन मिलता है। इनमें वराह अवतार बेहद खास माना जाता है। हर साल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को वराह जयंती मनाई जाती है।
-: क्यों लिया वराह अवतार? :-
पौराणिक मान्यता के अनुसार, हिरण्याक्ष नामक असुर अपनी शक्ति के बल पर तीनों लोकों में आतंक मचा रहा था। उसने देवताओं को स्वर्ग से बाहर कर दिया और पृथ्वी को समुद्र के भीतर छिपा दिया। इससे सृष्टि का संतुलन बिगड़ने लगा।
तब देवताओं के आह्वान पर भगवान विष्णु ने हिरण्याक्ष का अंत करने के लिए वराह रूप धरा। हिरण्याक्ष ने ब्रह्मा जी से ऐसा वरदान प्राप्त किया था कि वह ज्ञात जीवों और पशुओं से नहीं मारा जाएगा। *वराह* का नाम इसमें शामिल नहीं था। इसी कारण भगवान विष्णु ने विशाल वराह रूप धारण कर हिरण्याक्ष का वध किया और पृथ्वी को समुद्र से बाहर निकालकर उसकी रक्षा की। (संकलन – प्रीति चौहान)

