
नर्मदापुरम / आम जनता की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए आयोजित ‘मुख्यमंत्री जनविश्वास शिविर’ में जमीनी स्तर पर चल रही प्रशासनिक मनमानी की चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। जिला मुख्यालय पर सांसद, विधायक, कमिश्नर और कलेक्टर की मौजूदगी के बावजूद तहसील स्तर के अमले ने एक पीड़ित ग्रामीण के साथ सरेआम छल कर दिया। हल्का पटवारी की कथित चालाकी के चलते पीड़ित का आवेदन न तो रजिस्टर में चढ़ा और न ही सरकारी पोर्टल पर दर्ज हुआ, जिससे वह योजना और शिविर के लाभ से सीधे तौर पर वंचित रह गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित भुवनेश्वर पटेल अपनी फरियाद लेकर बड़ी उम्मीदों के साथ मुख्यमंत्री जनविश्वास शिविर में पहुंचे थे। उन्होंने शिविर में उपस्थित सभी वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों और उच्चाधिकारियों को अपनी समस्या बताई। इसके बाद जब वे तहसील काउंटर पर आवेदन जमा करने पहुंचे, तो वहां तैनात हल्का पटवारी महेंद्र मालवीय ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत काम किया। आरोप है कि पटवारी ने आवेदन को अधिकृत सरकारी रजिस्टर या ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कराने के बजाय सेवानिवृत्त होने वाले राजस्व निरीक्षक (आरआई) के हाथ में थमा दिया। इसके बाद आवेदन को फाड़कर फेंक दिया गया।
निराकरण के आंकड़ों से बाहर करने की साजिश पोर्टल और रजिस्टर में प्रविष्टि न होने का सीधा अर्थ यह है कि यह मामला सरकारी रिकॉर्ड में कभी दर्ज ही नहीं माना जाएगा। जब आवेदन सिस्टम में आया ही नहीं, तो वह शिविर की निराकरण रिपोर्ट में भी शामिल नहीं होगा। अधिकारियों के सामने ही जिले के जिम्मेदार कर्मचारियों द्वारा एक गरीब की उम्मीदों पर पानी फेर दिया गया। बड़ा सवाल और कितनों के साथ हुआ ऐसा छल भुवनेश्वर पटेल का यह मामला सामने आने के बाद अब शिविर की पूरी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जब आला अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के नाक के नीचे इतनी बड़ी हेराफेरी संभव है, तो दूर-दराज से आए न जाने कितने अन्य असहाय हितग्राहियों के आवेदन इसी तरह रद्दी की टोकरी में फेंक दिए गए होंगे। इस पूरे प्रकरण ने ‘जनविश्वास’ शिविर की विश्वसनीयता पर गहरा दाग लगा दिया है, जिसमें अब वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा संज्ञान लेकर दोषी पटवारी पर कठोर कार्रवाई की दरकार है। अब जिला प्रशासन के अधिकारी आनन फानन में रिकार्ड लागू करने में लगे हैं।

