नर्मदापुरम / सुप्रसिद्ध सेठानी घाट पर विगत 147 वर्षों से श्रीरामलीला महोत्सव का परम्परागत 18 दिवसीय आयोजन होता किया आ रहा है। समिति के संयोजक प्रशांत मुन्नू दुबे ने जानकारी में बताया कि सेठ नन्हेलाल घासीराम द्वारा प्रारम्भ किये गए इस महोत्सव में अब शर्मा परिवार द्वारा आयोजित आगामी 2026 के मंचन लिए श्रीरामलीला महोत्सव समिति द्वारा प्रतिवर्ष आयोजन के 2 माह पूर्व मंचन के रिहर्सल की तैयारियां प्रारम्भ कर दी जातीं है। उसी तारतम्य में सेठानी घाट पर सत्संग भवन में संगीत निर्देशक पं. राम परसाई और पं. सुनील चौरे के मार्गदर्शन में पात्राधिकारी दीपेश व्यास, माधव दुबे, अक्षय मिश्रा ने इस वर्ष के चयनित पात्रों को पुरातन साहित्यिक स्क्रिप्ट के अनुसार पाठ को कण्ठस्थ कराने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। गौरव की बात यह है कि नर्मदापुरम की श्रीरामलीला महोत्सव के 18 दिवसीय मंचन के विशाल आयोजन में नगर के ही छोटे छोटे बच्चे ही प्रभु श्रीराम , माता जानकी, श्रीभरत, श्री लक्ष्मण, श्री शत्रुघ्न के पात्रों की भूमिका बेहद अच्छे से निभाते है और उनके साथ समिति से वर्षों से जुड़े नगर के श्रद्धालु भी श्री रामकथा के विभिन्न प्रसंगों पर आधारित पात्रों की भूमिकाओं के किरदारों का जीवंत अभिनय करते हैं । श्रीरामलीला मंचन के साहित्य में वाल्मीकि रामायण, गोस्वामी तुलसीदास कृत श्रीराम चरितमानस और अन्य क्षेपकों और अन्य श्रीरामकथा पर आधरित प्रसंगों का सम्मिश्रण देखने को मिलेगा । समिति की कोशिश रहती है कि श्रीरामलीला दर्शन हेतु श्रद्धालुओं की रुचि श्रीरामकथा में अधिक से अधिक हो इसलिए सेठानीघाट पर प्रभु श्रीराम की बाललीलाओं से मंचन का प्रारम्भ किया जाता है और लंका दहन तक कि लीलाओं का मंचन सेठानीघाट पर ही होता है। उसके बाद श्रीराम- रावण युद्ध की चारों लीलाओं का मंचन दशहरा मैदान में होता है। ततपश्चात प्रभु श्रीराम के वनवास की अवधि समाप्त होने व रावण वध के उपरांत उत्तरभरत मिलाप और श्री राम राज्याभिषेक की लीलाओं का मंचन पुनः सेठानीघाट पर बने विशाल मंचों से ही होता है । समिति द्वारा यह आग्रह है कि यदि नगर के किसी भी श्रद्धालु जन व स्टेज कलाकरों को अभिनय करने का शौक है, तो सेठानीघाट पर स्थित सत्संग भवन में प्रतिदिन रात्रि 8 बजे से चल रही रिहर्सल में उपस्थित होकर मंचन में अपने अभिनय की भूमिका निर्धारित करने के लिए आमंत्रित है।

