

नर्मदापुरम / इटारसी / कहते हैं देह नश्वर है, लेकिन मनुष्य के कर्म और परोपकार समय के भाल पर अमिट हस्ताक्षर छोड़ जाते हैं। समाज में निस्वार्थ सेवा की मिसाल रहे पूर्व पार्षद एवं पूज्य सिंधी पंचायत के पूर्व अध्यक्ष स्व. धर्मदास मिहानी का जन्म स्मृति दिवस 4 सितंबर, मिहानी परिवार द्वारा “सेवा दिवस” के रूप में अत्यंत श्रद्धा और दार्शनिक भाव से मनाया गया। इस अवसर पर परिवार ने यह साबित कर दिया कि “इंसान चला जाता है, लेकिन उसकी सेवा और संस्कार हमेशा समाज की रगों में जीवित रहते हैं”।
शिक्षा का उजियारा और जीवन संगिनी का समर्पण….
वार्ड क्रमांक 30 स्थित गर्ल्स स्कूल में स्व. मिहानी का जन्म स्मृति दिवस एक बेहद भावपूर्ण और सार्थक तरीके से मनाया गया। इस अवसर पर उनकी धर्मपत्नी श्रीमती आशा मिहानी एवं पूरे मिहानी परिवार द्वारा कक्षा 9वीं से 12वीं तक की छात्राओं को स्कूल ड्रेस वितरित की गई। कार्यक्रम में छात्राओं ने भी अपने इस ‘मार्गदर्शक’ को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। शिक्षा के प्रति यह प्रोत्साहन एक सच्चे विजनरी को सबसे उपयुक्त नमन है।
वात्सल्य, बुजुर्गों का सम्मान और चेहरों पर मुस्कान…..
इस सेवा महायज्ञ में समाज के हर उस वर्ग को छुआ गया, जिसे संबल और अपनत्व की दरकार है। स्थानीय वृद्धाश्रम में 25 बुजुर्गों को पूरे सम्मान के साथ भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लिया गया, ताकि उन्हें परिवार की कमी का अहसास न हो। वहीं, ‘मुस्कान संस्था’ (बालिका गृह) में 35 बच्चियों को भोजन कराने के साथ आवश्यक दैनिक सामग्री प्रदान की गई। इन बच्चियों के चेहरों पर खिली मुस्कान मानो स्व. मिहानी को दी गई सबसे सुंदर पुष्पांजलि थी।
अन्नदान से लेकर गौ-सेवा तक: जीव मात्र के प्रति करुणा…..
सेवा का यह सफर केवल इंसानों तक सीमित नहीं रहा। मिहानी परिवार ने ‘खाटू श्याम सामुदायिक रसोई’ की भोजन व्यवस्था में विशेष सहयोग देने के साथ-साथ गौशाला पहुंचकर गौ-माता को गुड़ और रोटी खिलाई तथा संस्था को आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया।
दिनभर सेवा का अनवरत दौर चला…..
सुबह पुराने फल बाज़ार में धर्मदास मिहानी मित्र मंडल द्वारा जरूरतमंदों को पोहा वितरण, दोपहर में सिविल अस्पताल के मरीजों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना के साथ सिंधी व्यापार महासंघ द्वारा ताज़े फलों का वितरण और शाम को ‘बढ़ते कदम संस्था’ के सौजन्य से पुराने फल बाज़ार में साबूदाना खिचड़ी का वितरण किया। इतना ही नहीं, राह चलते कई जरूरतमंदों को भी आत्मीयता से भोजन कराया गया ताकि कोई भूखा न सोए।
एक दार्शनिक और प्रेरणादायक पहल……
अक्सर लोग अपने प्रियजनों के जन्मदिन या पुण्यतिथि पर सिर्फ रस्मी आयोजनों तक सीमित रह जाते हैं। लेकिन, मिहानी परिवार का यह कदम एक गहरा सामाजिक दर्शन प्रस्तुत करता है कि यादें केवल तस्वीरों में नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की दुआओं में महफूज़ रहनी चाहिए। जिन जनसेवा के कार्यों से स्व. मिहानी ने जीवनभर इटारसी के लोगों के दिलों में जगह बनाई। आज उनका परिवार उन्हीं परोपकारी कार्यों की विरासत को आगे बढ़ाते हुए उनकी स्मृतियों को अमर कर रहा है। यह ‘सेवा दिवस’ केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि समाज के लिए एक स्पंदित प्रेरणा है।

