

नर्मदापुरम / जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के एक मामले में खाताधारक के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने भारतीय स्टेट बैंक और सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया को आदेश दिया है कि वे परिवादी के खातों से अवैध रूप से काटी गई राशि एक माह के भीतर 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ वापस करें।
यह है पूरा मामला…
माखननगर निवासी लखनलाल साहू के दो अलग-अलग बैंक खातों से 24 मार्च 2024 को साइबर फ्रॉड के जरिए अनाधिकृत लेन-देन हुआ था। धोखेबाजों ने उनके भारतीय स्टेट बैंक के खाते से 98,938 और सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया के खाते से भी 98,938 की राशि पार कर दी थी। पीड़ित ने बैंकों को इस अनधिकृत लेन-देन की सूचना दी, लेकिन बैंकों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न करने और राशि वापस न लौटाने पर उन्होंने उपभोक्ता फोरम की शरण ली। अधिवक्ता दिलीप सिंह ठाकुर ने फरियादी की ओर से पैरवी की। आयोग के समक्ष परिवाद दायर किया गया, जिसमें एसबीआई माखननगर, सेन्ट्रल बैंक माखननगर तथा एक्सिस बैंक दादर शाखा, मुंबई को पक्षकार बनाया गया।
उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष विजय कुमार पाण्डेय एवं सदस्य सरिता द्विवेदी की पीठ ने मामले की सुनवाई की। आयोग ने भारतीय रिजर्व बैंक के परिपत्र का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि घटना के 3 कार्य दिवसों के भीतर बैंक को सूचित कर दिया है, तो खाताधारक बैंक का यह प्राथमिक दायित्व बनता है कि वह ग्राहक की पूरी रकम वापस करे। आयोग ने बैंकों द्वारा राशि न लौटाए जाने को ‘सेवा में कमी’ और एक्सिस बैंक के कृत्य को अनुचित व्यापार व्यवहार माना।
एसबीआई को एक माह के भीतर 98,938 की राशि, 6% वार्षिक साधारण ब्याज सहित परिवादी को भुगतान करे। सेन्ट्रल बैंक को निर्देश एक माह के भीतर 98,938 की राशि 6% वार्षिक साधारण ब्याज सहित अदा करे।

