

नर्मदापुरम / श्रावण पूर्णिमा के पावन अवसर पर माँ नर्मदा शंकर ब्राह्मण सेवा समिति के तत्वावधान में शुक्रवार को सेठानी घाट स्थित विंध्याचल शेड में विप्र समागम, श्रावणी उपाकर्म एवं ब्रह्मकर्म महोत्सव का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। धार्मिक आस्था, वैदिक परंपरा और सामाजिक एकता से ओतप्रोत इस आयोजन में मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों सहित प्रदेश के बाहर से भी बड़ी संख्या में विप्रजन एवं विद्वतगण शामिल हुए।
महोत्सव का शुभारंभ प्रातः 6 बजे से सेठानी घाट पर हुआ, जहां विप्रजनों ने विधिवत प्रायश्चित, संकल्प एवं दशविधि स्नान किया। इसके पश्चात सभी विप्रजन विंध्याचल शेड पहुंचे, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सप्तऋषियों का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद श्रावणी उपाकर्म एवं ब्रह्मकर्म से संबंधित धार्मिक अनुष्ठान वैदिक पद्धति एवं परंपरागत विधि-विधान के साथ संपन्न कराए गए।
विप्र समागम बना आकर्षण का केंद्र…..
महोत्सव में प्रदेश के अनेक जिलों से पहुंचे विप्रजनों एवं विद्वतगणों की उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। प्रदेश के बाहर से भी विप्र समाज के प्रतिनिधियों ने आयोजन में सहभागिता की। लंबे समय बाद एक ही मंच पर बड़ी संख्या में विप्रजनों के एकत्रित होने से आयोजन ने सामाजिक एकता और आपसी समन्वय का संदेश दिया।
आयोजन स्थल पर पूरे समय वैदिक मंत्रोच्चार एवं धार्मिक जयघोष से वातावरण आध्यात्मिक और भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं एवं विप्रजनों ने धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के साथ सनातन संस्कृति और वैदिक संस्कारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने पर जोर….
समिति पदाधिकारियों ने कहा कि श्रावणी उपाकर्म हमारी प्राचीन वैदिक परंपरा का महत्वपूर्ण अंग है। इसका उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संस्कार, कर्तव्यबोध और समाज में सद्भाव की भावना को मजबूत करना भी है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवा पीढ़ी को अपनी गौरवशाली वैदिक परंपराओं एवं सनातन संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
पं. सुरेश शर्मा के आचार्यत्व में हुआ अनुष्ठान…..
संपूर्ण कार्यक्रम आचार्य पंडित सुरेश शर्मा के आचार्यत्व में वैदिक पद्धति एवं शास्त्रोक्त विधि-विधान के अनुसार संपन्न हुआ। आयोजन के सफल समापन पर माँ नर्मदा शंकर ब्राह्मण सेवा समिति ने सभी विप्रजनों, विद्वतगणों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। समिति ने कहा कि धर्म, संस्कृति, संस्कार एवं समाज की एकता के उद्देश्य से भविष्य में भी इस प्रकार के धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन निरंतर किए जाएंगे।

