नर्मदापुरम / सिवनी मालवा / चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में स्थानीय अदालत ने आरोपी को बड़ी राहत देते हुए बरी कर दिया है। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी सुश्री अंजली अग्रवाल की कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी तुलसीराम केवट को धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के आरोपों से बरी करने का फैसला सुनाया। मामला परिवादी विपिन गिरी द्वारा दर्ज कराया गया था, जिन्होंने तुलसीराम पर 1.20 लाख का चेक बाउंस होने का आरोप लगाया था। अदालत में आरोपी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता नवीन वर्मा ने बताया कि सुनवाई के दौरान डिफेंस ने कोर्ट के सामने तथ्य रखे कि यह मामला साल 2021 के एक भूखंड (प्लॉट) के इकरारनामे और पुराने लेन-देन से जुड़ा है। इसमें सिर्फ 56,000 की राशि का ही जिक्र था और विवादित चेक को केवल सिक्योरिटी के तौर पर दिया गया था। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें और दस्तावेजों को देखने के बाद पाया कि परिवादी यह साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा कि आरोपी पर कानूनी रूप से 1.20 लाख की कोई देनदारी बनती थी। कोर्ट ने साफ किया कि सुरक्षा के चेक और अधूरी विधिक देयता के चलते धारा 138 का अपराध स्वतः सिद्ध नहीं होता। अपराध प्रमाणित न होने पर अदालत ने आरोपी को ससम्मान बरी कर दिया।

