



नर्मदापुरम / भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस शनिवार, 15 अगस्त 2026 को मनाएंगे। यह दिन 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से देश की आज़ादी की याद दिलाता है। 15 अगस्त 1947 की कहानी भारत के लगभग 200 वर्षों के ब्रिटिश शासन से मुक्ति, लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और ऐतिहासिक सत्ता हस्तांतरण की गाथा है, जिसमें पंडित जवाहरलाल नेहरू का भाषण, लाल किले पर तिरंगा फहराना, और देश का विभाजन शामिल है।
आजादी की पृष्ठभूमि और संघर्ष
====================
ब्रिटिश हुकूमत: व्यापारी के रूप में आई ईस्ट इंडिया कंपनी ने धीरे-धीरे पूरे भारत पर कब्जा कर लिया और लगभग दो सदियों तक अत्याचारपूर्ण शासन चलाया।
राष्ट्रीय आंदोलन: महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, सरदार पटेल और अनगिनत क्रांतिकारियों ने अहिंसक आंदोलनों व सशस्त्र संघर्षों के जरिए अंग्रेजों की नींव हिला दी।
द्वितीय विश्व युद्ध का प्रभाव: सन 1945 में युद्ध के बाद ब्रिटेन की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई और भारत में तीव्र जन-विद्रोह के कारण ब्रिटिश सरकार देश छोड़ने पर मजबूर हुई।
मुख्य विवरण
========
तारीख: शनिवार, 15 अगस्त 2026,
समारोह स्थल: लाल किला, नई दिल्ली।
राष्ट्रीय अवकाश: यह पूरे भारत में एक राजपत्रित अवकाश है, जिस कारण सभी स्कूल, कार्यालय और बैंक बंद रहते हैं।
15 अगस्त की तारीख क्यों चुनी गई?
====================
लॉर्ड माउंटबेटन का फैसला: अंतिम ब्रिटिश गवर्नर-जनरल लॉर्ड माउंटबेटन ने स्वतंत्रता के लिए 15 अगस्त की तारीख तय की, क्योंकि इसी दिन 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सेना ने मित्र राष्ट्रों के सामने आत्मसमर्पण किया था।
मध्यरात्रि का चयन: ज्योतिषियों ने 15 अगस्त को अशुभ बताया था, इसलिए अंग्रेजी समय के अनुसार 14-15 अगस्त की मध्यरात्रि (रात 12 बजे) पर सत्ता का हस्तांतरण तय हुआ क्योंकि तब नया दिन शुरू होता है।
ऐतिहासिक मध्यरात्रि और लाल किला ट्रिस्ट विद डेस्टिनी: 14-15 अगस्त की मध्यरात्रि को संविधान सभा की बैठक में पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपना प्रसिद्ध भाषण “Tryst with Destiny” दिया।
ध्वजारोहण: 15 अगस्त 1947 के दिन सुबह पंडित नेहरू ने दिल्ली के लाल किले के लाहौरी गेट पर पहली बार तिरंगा झंडा फहराया।
विभाजन का दर्द: आजादी की खुशी के साथ-साथ देश के विभाजन की त्रासदी भी जुड़ी थी, जिसके कारण भारत और पाकिस्तान दो अलग राष्ट्र बने और लाखों लोगों को विस्थापन का दर्द झेलना पड़ा।
स्वतंत्रता दिवस का महत्व
================
देश के स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को श्रद्धांजलि दी जाती है।
देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और संविधान के प्रति सम्मान की भावना को सुदृढ़ किया जाता है।
विद्यालयों, महाविद्यालयों, सरकारी कार्यालयों और विभिन्न संस्थानों में ध्वजारोहण, सांस्कृतिक कार्यक्रम, देशभक्ति गीत तथा भाषण आयोजित किए जाते हैं।
नई दिल्ली के लाल किले से भारत के प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं और राष्ट्र को संबोधित करते हैं। (संकलन – प्रीति चौहान)

