
नर्मदापुरम / शहर के समीपस्थ ग्राम निमसाड़िया में गौ माता के साथ हुए घिनौने और निंदनीय कृत्य का मामला अब एक नया मोड़ ले चुका है। आरोपी लाला पड़ियार की करतूत पर जहां पूरे गांव में गहरा आक्रोश है, वहीं अब इस पूरे घटनाक्रम में लोहे का कारोबार करने वाले व्यापारी प्रदीप गिल (गिल्ला बंधु) की संदिग्ध भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोपी को एक सप्ताह के लिए गांव से बाहर निकाला गया है । ग्रामीणों और प्रबुद्ध वर्ग ने इस मामले में केवल आरोपी ही नहीं, बल्कि घटना को छिपाने वाले व्यापारी पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई है।
कारखाने के सीसीटीवी में कैद हुई घटना….
आरोपी लाला पड़ियार व्यापारी प्रदीप गिल्ला के कारखाने में काम करता था। आरोप है कि उसने कारखाने के भीतर ही गौ माता के साथ आपत्तिजनक कृत्य किया, जिसकी पूरी वारदात वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई। व्यापारी की भूमिका पर उठते सवाल मामले की जानकारी मिलने के बाद व्यापारी ने आरोपी के साथ मारपीट की और उसके परिजनों को बुलवाया, लेकिन इतने गंभीर व संवेदनशील अपराध की सूचना तत्काल पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को नहीं दी। ग्रामीणों का कहना है कि जब कारखाने में इतना बड़ा कुकृत्य हुआ और सीसीटीवी के रूप में ठोस साक्ष्य मौजूद थे, तो व्यापारी ने इसे पुलिस से क्यों छुपाया? किसी गंभीर अपराध की जानकारी दबाना और खुद ही फैसला करने की कोशिश करना जांच का विषय है। पंचायत का कड़ा फैसला घटना की खबर मिलते ही ग्राम सरपंच बालेंद्र पटेल की मौजूदगी में ग्रामीणों और पंचों की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए आरोपी लाला पड़ियार को गांव से निष्कासित कर दिया गया। सरपंच बालेंद्र पटेल ने कहा कि गौ माता के साथ ऐसा घिनौना कृत्य अत्यंत निंदनीय है, जिससे पूरे समाज और गांव की प्रतिष्ठा धूमिल हुई है। अतीत के उदाहरण से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग ग्रामीणों ने याद दिलाया कि कुछ वर्ष पूर्व निमसाड़िया में किसी अन्य समाज के व्यक्ति द्वारा गलत कृत्य किए जाने पर गांव ने एकजुट होकर कठोर कदम उठाए थे और उसे गांव छोड़ने पर मजबूर कर दिया था। स्थानीय लोगों का मानना है कि गौ माता जिनमें 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना जाता है—के साथ ऐसा दुराचार करने वाले व्यक्ति को केवल गांव से निकालना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे सख्त से सख्त कानूनी सजा मिलनी चाहिए। इसके साथ ही, कानून से बात छिपाने वाले व्यापारी पर भी समान रूप से जवाबदेही तय होनी चाहिए। आरोपी लाला पड़ियार पर पशु क्रूरता और संबंधित कठोर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जेल भेजा जाए। व्यापारी पर जांच घटना की जानकारी होने के बावजूद पुलिस को सूचित न करने, साक्ष्य छिपाने और देरी करने के मामले में व्यापारी पर विधिक कार्रवाई की जाए।

