

नर्मदापुरम / इटारसी / श्रावण मास के पावन पर्व पर वृंदावन धाम से पधारे आचार्य परम श्रद्धेय पं. नवल किशोर शास्त्री के श्रीमुख से न्यास कॉलोनी इटारसी स्थित वृंदावन गार्डन में संगीतमय श्री शिवमहापुराण कथा में सभी युगों में होने वाले शिवलिंग निर्माण के बारे में विस्तार से बताया।
द्वितीय दिवस की कथा में कथावाचक श्री शास्त्री ने बेलपत्र की महिमा के बारे में श्रद्धालुओं को बताया। उन्होंने कहा कि शिवमहापुराण की रुद्रसंहिता के अनुसार त्रेतायुग में स्वर्ण (सोने) से बने शिवलिंग की पूजा और उपासना का विधान था। इस युग में सोने के शिवलिंग के पूजन से विशेष पुण्य और सिद्धि प्राप्त होती थी। चारों युगों में शिवलिंग के प्रकार धार्मिक ग्रंथों के अनुसार प्रत्येक युग में अलग-अलग सामग्री या धातुओं से बने शिवलिंग की पूजा का महत्व बताया गया है।
सतयुग में मणियों और रत्नों से बने शिवलिंग, त्रेतायुग में स्वर्ण (सोने) से बने शिवलिंग,द्वापर युग में पाषाण (पत्थर) से बने शिवलिंग,कलियुग में पार्थिव (मिट्टी) से बने शिवलिंग बनाए जाते हैं। शिव के भजनों का आनंद भी हर हर महादेव का जयघोष कर धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं ने जमकर लिया।
आयोजक पं. अरुण शास्त्री ने बताया कि सवा लाख पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं महारुद्राभिषेक पूजन कार्य निरंतर चल रहा है जो कि कथा के साथ साथ 12 अगस्त तक चलेगा। कथा के अंत में भोलेनाथ की भव्य आरती कर प्रसादी वितरित की गई।

